जाति का दर्द नही झेला. इसलिए आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*:--आशीष कुमार

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 *जाति का दर्द नही झेला. इसलिए  आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*  *गरीबी नहीं, सामाजिक भेदभाव है असली कारण*           ( आशीष कुमार. राज्य संयोजक शोषण मुक्ति मंच ) शांता कुमार  द्वारा कुछ दिन पूर्व दिये ब्यान में  यह कहना कि देश में आरक्षण का आधार जाति नहीं बल्कि केवल गरीबी होना चाहिए, न तो कोई नया तर्क है और न ही यह भारतीय समाज की वास्तविकता को समझने वाला दृष्टिकोण है। सच यह है कि भारत में आरक्षण की व्यवस्था गरीबी दूर करने के लिए नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे जातिगत भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और अवसरों की असमानता को दूर करने के लिए बनाई गई थी। भारत का संविधान, जिसे B. R. Ambedkar जैसे महान समाज सुधारकों ने गढ़ा, इस सच्चाई को स्वीकार करता है कि कुछ जातियों को केवल आर्थिक रूप से नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी दबाया गया। इसलिए आरक्षण सामाजिक न्याय का एक संवैधानिक उपाय है, न कि कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम। अगर आरक्षण को केवल आर्थिक आधार से जोड़ने की बात की जाती है, तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि EWS आरक्षण पर शांता कुमार जैसे नेता अक्सर खाम...

हिमाचल प्रदेश में मजदूरों और किसानों की एकता: एक नई दिशा की ओर* आशीष कुमार (हि०प्र०)


 *हिमाचल प्रदेश में मजदूरों और किसानों की एकता: एक नई दिशा की ओर*

             आशीष कुमार (हि०प्र०)


 भारी बारिश और खराब रास्स्तों के चलते 9 जुलाई की   राष्ट्रवायापी हड़ताल के आहवाहन  पर  हिमाचल प्रदेश में मजदूरों और किसानों की एकता ने एक बार फिर से अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है।  हाल ही में हुई प्रदेशव्यापी हड़ताल में हजारों मजदूरों और किसानों ने भाग लिया, जो केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट हुए हैं। इस ऐतिहासिक  हड़ताल में मजदूर वर्ग हिमाचल के हर जिला और तहसील मुख्यालय पर इस हड़ताल का हिस्सा बने, हिमाचल प्रदेश के जिला मुख्यालयों और राजधानी  में चार लेबर  कोड के विरोध में  हजार्रो की संख्या में अलग अलग यूनियन से लोग हड़ताल में उतरे पूरे राज्य में लाल झंडो और सीटू के बैनर तले, आंगनबाड़ी ,मिड डे  मील वर्करज, निर्माण, मनरेगा मजदूर, हाइडल  का मजदूर, आउटसोर्स कर्मी, रेहड़ी फड़ी, मेडिकल कॉलेज,,108/102 कर्मचारी यूनियन, हिमाचल किसान सभा,जनवादी महिला समिति, दलित शोषण मुक्ति मंच आदि    लगभग ,18000 से 20000 मजदूर वर्ग प्रत्यक्ष रूप से इस हड़ताल के समर्थन में सड़को पर उतरे और तकरीबन इतने ही लोगों ने काम  बंद कर इस हड़ताल का समर्थन किया । इस हड़ताल मे  मजदूरों और किसानों की मांगें- न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रति माह-,चार श्रम संहिताओं को रद्द करना- नियमित रोजगार- मनरेगा बजट में बढ़ोतरी,किसानों की कर्जा मुक्ति ,न्यूनतम समर्थन मूल्य की माँग  के नारे पूरे हिमाचल प्रदेश की सड़को पर गूंजे। हड़ताल में शामिल मजदूरों और किसानों ने जिला और ब्लॉक मुख्यालयों पर प्रदर्शन और रैलियां कीं ये रैलिया हिमाचल प्रदेश के हर जिला में  संयुक्त ट्रेड यूनियन की समन्वय समिति और  सीटू के नेतृत्ब मे की गई  सीटू के राज्य नेतृत्व  अध्यक्ष और  ,महासचिव  विजेंद्र मेहरा और प्रेम गौतम ने इस   हड़ताल को  सफल करार देते हुए कहा की  इस हड़ताल मे शामिल हो कर   मजदूरों ने अपनी एकता का प्रदर्शन किया,और कहा की 

मजदूरों और किसानों की एकता ने एक नई दिशा की ओर कदम बढ़ाया है। आगे की लड़ाई में मजदूरों और किसानों को अपनी एकता को मजबूत करना होगा और सरकार के खिलाफ अपना विरोध जारी रखना होगा।

हिमाचल प्रदेश में मजदूरों और किसानों की एकता ने एक बार फिर से अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। आगे की लड़ाई में मजदूरों और किसानों को अपनी एकता को मजबूत करना होगा और सरकार के खिलाफ अपना विरोध जारी रखना होगा।

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