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Showing posts from May, 2021

दीयों की रोशनी में दिखाई देते अंधेरे — आशीष कुमार ‘आशी’

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 दीयों की रोशनी में दिखाई देते अंधेरे — आशीष कुमार ‘आशी’ सेवा संकल्प और विकास के प्रतीक के रूप में 17 सितम्बर  प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर देशभर में दीये जलाए गए। हर जगह  रोशनी हुई, उत्सव हुआ, तस्वीरें खिंचीं और इसे सेवा, संकल्प और विकास का प्रतीक बताया गया। लेकिन कभी-कभी बहुत ज्यादा रोशनी भी उन सवालों को और साफ कर देती है, जिन्हें हम अंधेरे में छिपा देना चाहते हैं। सत्ता के उत्सव और जनता की जिंदगी के बीच का यह फासला जितना चमकदार बनाया जाता है, उतना ही तीखा दिखाई देता है।  2014 से और आज तक बहुत कुछ बदला है , या फिर ऐसा दर्शाने की कोशिश हुई है की देश की शुरुवात सही मायने में 2014 में हुई  और धीरे धीरे शायद यदि जनता की  आँखे ऐसे ही इन  दियों से चोंधियाती रही तो शायद ये भी सम्भव है की 17 सितम्बर 1950 में गुजरात के  वडनगर में मोदी जी का जन्म हुआ शायद उसे चार धामों की तरह पाँचवे धाम में ना बताना शुरु कर दे,  परन्तु  आज उन्हीं दीयों की लौ को देखते हुए एक मजदूर पूछ रहा है—मेरी मेहनत की न्यूनतम कीमत आखिर कब तय होगी? काम के सही दाम , समान काम का ...

सीटू विचार भी ,हथियार भी:---- विजेंद्र मेहरा

 *सीटू - विचार भी,हथियार भी* *विजेंद्र मेहरा* *प्रदेशाध्यक्ष सीटू,हि. प्र.*            30 मई भारत वर्ष के क्रांतिकारी मजदूर वर्ग के लिए कोई आम दिन नहीं है। यह दिन भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इस दिन मजदूर वर्ग के क्रांतिकारी व वैज्ञानिक विचारधारा वाले मजदूर संगठन सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियनज़(सीटू) का वर्ष 1970 में कलकत्ता में जन्म हुआ था। भारत वर्ष का मजदूर आंदोलन देश के साम्राज्यवाद,उपनिवेशवाद,सामंतवाद विरोधी आंदोलन का प्रतिबिम्बन रहा है। वर्ष 1920 में जब देश में मजदूर संगठन एटक का गठन हुआ तो यह दो बुनियादी बातों को लेकर संघर्षरत हुआ। पहली बात यह थी कि मजदूर वर्ग शोषणकारी पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई तेज करके शोषणविहीन समाज की स्थापना के लिये कार्य करेगा। दूसरी बात यह थी कि मजदूर,किसान,खेतिहर मजदूर,महिला,छात्र व नौजवान तबकों की व्यापक एकता कायम करते हुए देश से ब्रिटिश हुकूमत को खदेड़ने के लिए देश के आज़ादी के आंदोलन में यह अपनी निर्णायक भूमिका निभाएगा। इसी बुनियाद पर भारत में मजदूर आंदोलन की राष्ट्रव्यापी बुनियाद खड़ी की गई। इसी परिदृश्य म...

राष्ट्रवाद के डिस्कोर्स में कांग्रेसी पूरी तरह आरएसएस के गिरफ्त में फंस चुके हैं।:---राजीव कुंवर

 राष्ट्रवाद के डिस्कोर्स में कांग्रेसी पूरी तरह आरएसएस के गिरफ्त में फंस चुके हैं।  किसी भी कांग्रेसी से बात कीजिए वे भी राष्ट्रवाद का साम्राज्यवाद विरोधी स्वरूप विस्मृत कर चुके हैं। एक कांग्रेसी सज्जन बोले कि बताएं जिन्ना की तस्वीर को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में लगाने का क्या मतलब ? वे हमास के हमले और इजरायल के हमले को एक ही श्रेणी में रखने की बात करते हैं परंतु थोड़ा कुरेदने पर हमास को आतंकवादी संगठन वैसे ही कहते हैं जैसे आरएसएस। एकदम से ताव में आकर वे बोले कि आखिर हमास को फिलिस्तीन की ठेकेदारी किसने दे दी? यासिर अराफात तो ठीक पर हमास कैसे ठीक ? मैंने हल्के से पूछ दिया कि सुभाषचंद्र बोस को किसने ठेकेदारी दी थी? गूँगियाने लगे।  हिंसा अपने आप में कोई मूल्य थोड़े न रखता है! पहले तो सर्वाइकल ऑफ द फिटेस्ट से लेकर बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है का नेचुरल जस्टिस मने प्राकृतिक न्याय माना जाता था। आधुनिक सार्वभौमिक मूल्य ने इसे बदल दिया। हर व्यक्ति की स्वतंत्रता और बराबरी को सार्वभौमिक मूल्य माना गया। ऐसे में स्वतंत्रता और बराबरी के लिए प्रतिरोध को मूल्यवान माना गया। स्वतंत्रत...