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Showing posts from October, 2020

मजदूर दिवस और बुद्ध पूर्णिमा: श्रम, करुणा और न्याय का प्रश्न* :---- आशीष कुमार

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 *मजदूर दिवस और बुद्ध पूर्णिमा: श्रम, करुणा और न्याय का प्रश्न* :---- आशीष कुमार आशी आज एक ओर पूरी दुनिया मजदूर दिवस मना रही है, तो दूसरी ओर बुद्ध पूर्णिमा भी है। यह संयोग केवल कैलेंडर का नहीं, बल्कि विचारों का है—श्रम और करुणा, न्याय और मानव गरिमा के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है । मजदूर दिवस हमें उन हाथों की संघर्षों की  याद दिलाता है, जिन्होंने दुनिया को गढ़ा है। बुद्ध पूर्णिमा हमें उस चेतना की याद दिलाती है, जिसने मनुष्य को दुःख, असमानता और शोषण के कारणों को समझने और उनसे मुक्ति की दिशा दिखाई। मजदूर दिवस का ऐतिहासिक आधार भारत में पहली बार 1 मई 1923 को मजदूर दिवस मनाया गया था। इसके पीछे पूरी दुनिया में हुए मजदूर आंदोलनों की लंबी श्रृंखला थी, जिसकी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 1886 का शिकागो आंदोलन रहा, जहाँ 8 घंटे काम के अधिकार के लिए मजदूरों ने संघर्ष किया और अपने जीवन तक बलिदान कर दिए। यह इतिहास बताता है कि श्रम अधिकार कभी दया से नहीं मिले, बल्कि संघर्ष और संगठित शक्ति से प्राप्त हुए हैं। परन्तु  आज का सवाल भी यही है  क्या मजदूर की स्थिति बदली है?  लगभग एक सदी के...

दलित शोषण मुक्ति मंच ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा

 *दलित शोषण मुक्ति मंच सिरमौर* सेवा में         महामहिम राष्ट्रपति         भारत गणराज्य राष्ट्रपति भवन         नई दिल्ली 110011  विषय:---  ज्ञापन श्रीमान जी,               हिमाचल प्रदेश  दलित शोषण मुक्ति मंच   आपका ध्यान अभी हाल ही में 14 सितंबर 2020 को उत्तरप्रदेश के हाथरस में 19 वर्षीय दलित लड़की के साथ हुए अमानवीय दुष्कृत्य की तरफ आकर्षित करना चाहते है।  14 सितम्बर 2020 की सुबह कुछ स्वर्ण जाति के लोगों द्वारा दलित समाज की एक युवा लड़की के साथ बलात्कार किया गया और उसके पश्चात उसकी रीढ़ की हड्डी को तोड़ा गया दरिंदगी से उसका गला दबा कर उसकी जीभ को काट दिया गया  जिसके चलते 29 सितम्बर को पीड़िता की मौत हो जाती है  ।  उतर प्रदेश की अमानविय  सरकार की संवेदन हीनता के  चलते पीड़िता के परिवार को उसके पार्थिव शरीर न सौंप कर एक दलित परिवार अपनी पुत्री का अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाया। जोकि उतर प्रदेश की  योगी सरकार और वर्तमान में विश्वगुरु...