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Showing posts from August, 2026

दीयों की रोशनी में दिखाई देते अंधेरे — आशीष कुमार ‘आशी’

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 दीयों की रोशनी में दिखाई देते अंधेरे — आशीष कुमार ‘आशी’ सेवा संकल्प और विकास के प्रतीक के रूप में 17 सितम्बर  प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर देशभर में दीये जलाए गए। हर जगह  रोशनी हुई, उत्सव हुआ, तस्वीरें खिंचीं और इसे सेवा, संकल्प और विकास का प्रतीक बताया गया। लेकिन कभी-कभी बहुत ज्यादा रोशनी भी उन सवालों को और साफ कर देती है, जिन्हें हम अंधेरे में छिपा देना चाहते हैं। सत्ता के उत्सव और जनता की जिंदगी के बीच का यह फासला जितना चमकदार बनाया जाता है, उतना ही तीखा दिखाई देता है।  2014 से और आज तक बहुत कुछ बदला है , या फिर ऐसा दर्शाने की कोशिश हुई है की देश की शुरुवात सही मायने में 2014 में हुई  और धीरे धीरे शायद यदि जनता की  आँखे ऐसे ही इन  दियों से चोंधियाती रही तो शायद ये भी सम्भव है की 17 सितम्बर 1950 में गुजरात के  वडनगर में मोदी जी का जन्म हुआ शायद उसे चार धामों की तरह पाँचवे धाम में ना बताना शुरु कर दे,  परन्तु  आज उन्हीं दीयों की लौ को देखते हुए एक मजदूर पूछ रहा है—मेरी मेहनत की न्यूनतम कीमत आखिर कब तय होगी? काम के सही दाम , समान काम का ...

जब बराबरी खटकने लगे ,तो आरक्षण निशाने पर क्यों ?*

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 *जब बराबरी खटकने लगे ,तो आरक्षण निशाने पर क्यों ?* — आशीष कुमार ‘आशी’ आरक्षण को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज है। आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन हो रहे हैं। इस आंदोलन में शामिल युवाओं की बेचैनी को समझना भी जरूरी है। आखिर जब एक गरीब परिवार का बच्चा महंगी शिक्षा, कोचिंग और प्रतियोगिता की दौड़ में पीछे रह जाता है, तो उसके मन में व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। लेकिन हमें एक सवाल ईमानदारी से खुद से पूछना होगा ,क्या इस समस्या का समाधान किसी दूसरे गरीब के हिस्से का अधिकार कम करने में है? मेरे विचार से इसका जवाब साफ है—नहीं। एक गरीब परिवार का बच्चा चाहे किसी भी जाति से हो, उसकी परेशानी वास्तविक है। जिसके घर में दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो, उसके लिए महंगी शिक्षा और कोचिंग किसी पहाड़ से कम नहीं। इसलिए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा, छात्रवृत्ति, कोचिंग और रोजगार के विशेष अवसर बढ़ाए जाने चाहिए। लेकिन यहां एक बुनियादी बात समझना जरूरी है—आरक्षण केवल गरीबी दूर करने की योजना नहीं है। भारत में जाति केवल आर्थिक स्थिति का नाम नहीं रही। सदियों तक...

आँगनवाड़ी कर्मियों की मांगों को लेकर निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग से वार्ता, कई मांगों पर बनी सहमति*

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 *आँगनवाड़ी कर्मियों की मांगों को लेकर निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग से वार्ता, कई मांगों पर बनी सहमति* ________________________ शिमला। आँगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन की राज्य कमेटी की ओर से 8 जून की हड़ताल के प्रथम चरण के तहत आज महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में यूनियन की ओर से सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर, आँगनवाड़ी यूनियन की राज्य अध्यक्ष नीलम जसवाल, राज्य महासचिव वीना शर्मा, बिमला, सुषमा, अनुराधा सहित राज्य कमेटी के सात सदस्यों ने भाग लिया। बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए यूनियन की राज्य महासचिव वीना शर्मा ने कहा कि बैठक में आँगनवाड़ी कर्मियों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विभाग ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि आँगनवाड़ी कर्मियों को ग्रेच्युटी देने के लिए स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेज दिया गया है। स्वीकृति प्राप्त होते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। इसके अलावा लंबे समय से लंबित सुपरवाइजर भर्ती प्रक्रिया को जल्द शुरू करने का आश्वासन भी विभाग की ओर स...

हिमाचल के पुलिस महानिदेशक को पद से हटाने की माँग को लेकर राज्यपाल से मिला दलित शोषण मुक्ति मंच

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 *DSP विजय कुमार प्रकरण की स्वतंत्र जांच हो, DGP को पद से हटाया जाए : दलित शोषण मुक्ति मंच* __________________________  दलित शोषण मुक्ति मंच के राज्य संयोजक जगत राम एवं राज्य सह-संयोजक आशीष कुमार के नेतृत्व में आज एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल महोदय से मुलाकात कर अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। प्रतिनिधिमंडल में विवेक कश्यप, सतपाल मान, नरेश कुमार, निशा, नोख राम, ओम प्रकाश आदि शामिल रहे। मीडिया को संबोधित करते हुए जगत राम एवं आशीष कुमार ने कहा कि उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) शिमला श्री विजय कुमार द्वारा उठाया गया जातिगत उत्पीड़न का मामला गंभीर है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा इस मामले में DGP तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं सतर्कता) को तलब किया गया है। ऐसे में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए DGP को तत्काल वर्तमान पद से हटाया जाए और विजय कुमार की शिकायत की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच ऐसी एजेंसी से करवाई जाए जो DGP के प्रशासनिक नियंत्रण में न हो। उन्होंने कहा कि चंबा-चुराह प्रकरण में चुराह उत्सव के दौरान स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत क...

हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार: आधुनिक हिमाचल की नींव रखने वाले युगदृष्टा — आशीष कुमार

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जब भी हिमाचल प्रदेश के निर्माण और विकास की चर्चा होगी, सबसे पहला नाम डॉ. यशवंत सिंह परमार का लिया जाएगा। उन्हें केवल हिमाचल प्रदेश का प्रथम मुख्यमंत्री कहना उनके व्यक्तित्व और योगदान को सीमित कर देना होगा। वे उस विचार के जनक थे जिसने बिखरे हुए पहाड़ी क्षेत्रों को एक सशक्त, आत्मसम्मानी और विकासोन्मुख राज्य के रूप में स्थापित किया। आधुनिक हिमाचल जिस मजबूत नींव पर आज खड़ा है, उस नींव का प्रत्येक आधार-स्तंभ डॉ. परमार की दूरदर्शिता, संघर्ष और विकास-दृष्टि का परिणाम है। इसलिए उन्हें "हिमाचल निर्माता" कहा जाता है। 4 अगस्त केवल एक महान नेता की जयंती नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति के विचारों को याद करने का अवसर है जिसने सत्ता को साधन माना, लक्ष्य नहीं। जिसने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया और जिसने हिमाचल के विकास की शुरुआत गांव, किसान और पंचायत से की। डॉ. यशवंत सिंह परमार का जन्म सिरमौर जिले के चनहालग क्षेत्र की लाना बाका पंचायत में हुआ। पहाड़ की कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े डॉ. परमार ने बचपन से ही ग्रामीण जीवन की चुनौतियों को देखा और समझा। यही अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीति और विकास की ...