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Showing posts from December, 2025

हिमाचल सरकार अप्रैल 2026 से ₹1,000 की घोषित वृद्धि एरियर सहित जारी करे, केवल अधिसूचना नहीं अपना वादा पूरा करे सरकार

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हिमाचल सरकार अप्रैल 2026 से ₹1,000 की घोषित वृद्धि एरियर सहित जारी करे, केवल अधिसूचना नहीं अपना वादा पूरा करे सरकार जिला सिरमौर के पौंटा साहिब, नाहन, संगड़ाह, राजगढ़ और पच्छाद परियोजनाओं में 23 अक्टूबर को आंगनवाड़ी वर्करज एवं हेल्परज यूनियन संबंधित सीटू के आह्वान पर कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने मानदेय वृद्धि की अधिसूचना के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने हिमाचल सरकार से बजट में घोषित ₹1,000 की मानदेय वृद्धि अप्रैल 2026 से एरियर सहित लागू करने की मांग की। यूनियन नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बजट में अप्रैल 2026 से मानदेय वृद्धि की घोषणा की गई थी, लेकिन अब इसे 1 नवंबर 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी करना आंगनवाड़ी कर्मियों के साथ सरासर धोखा है। सरकार अपने ही बजट की घोषणा से पीछे हटकर हजारों आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों के आर्थिक हितों पर चोट कर रही है। महंगाई के इस दौर में मामूली मानदेय पर काम करने वाली कर्मियों को उनके हक से वंचित करना अन्यायपूर्ण है। नेताओं ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, टीकाकरण तथा महिला एवं बाल विकास से ...

ज़ुल्म की खिलाफ कलम

हम ख़ामोश नहीं, अब इतिहास लिखेंगे, ज़ुल्म के हर क़िले से टकराकर इंक़लाब लिखेंगे। जो हक़ छीनेगा, उससे जंग तय है हमारी, एकता और संघर्ष क़ो मिलाकर इंसाफ़ लिखेंगे। जो ख़ामोश हैं, उन्हें रहने दो खामोश ही उनकी भी चुप्पी में दबे जज़्बात लिखेंगे, भूख से जो मर रहे है हजारों लोग   कोई लिखें ना बेशक हम उनके भी   बदतर हुए हालात लिखेंगे। वो लिखेंगे देशद्रोह के पर्चे हम पर  हम सच को सच, साफ़–साफ़ लिखेंगे। सूनी वीरान सड़कों पर गूंजती नारों की ललकार लिखेंगे, डर की चुप्पियों को तोड़कर हम हक़ की सीधी बात लिखेंगे। तोड़ कर बेड़ियाँ  गुलामी की ,  नई आजादी का अहसाह  लिखेंगे  ज़ुल्म की काली इबारत पर संघर्ष का लाल इतिहास लिखेंगे

किन्नौर के सांगला में दलित युवक पर जानलेवा जातिगत हमला:- शोषण मुक्ति मंच,

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  किन्नौर के सांगला में दलित युवक पर जानलेवा जातिगत हमला कमज़ोर धाराएँ लगाकर मामले को दबाने की कोशिश  किन्नौर जिला के सांगला क्षेत्र में एक दलित युवक पर तीन युवकों द्वारा की गई बर्बर मारपीट अब जानलेवा हमले का रूप ले चुकी है। पीड़ित युवक की हालत गंभीर बनी हुई है, जिसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) सांगला से रीजनल हॉस्पिटल रिकॉन्गपियो रेफर किया गया है। यह घटना स्पष्ट रूप से जान से मारने की कोशिश है, न कि साधारण मारपीट। शोषण मुक्ति मंच, हिमाचल प्रदेश की राज्य कमेटी इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मंच का आरोप है कि पुलिस ने मामले की गंभीरता को जानबूझकर कम करते हुए बहुत कमजोर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है , जबकि यह साफ तौर पर भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज किया जाना चाहिए था। शोषण मुक्ति मंच के राज्य संयोजक आशीष कुमार , सह-संयोजक राजेश कोष और मिंटा ज़िंटा ने कहा कि दलित युवक को पीटते समय आरोपियों द्वारा जातिसूचक गालियाँ दी गईं, घटना का वीड...

तीन माह से लंबित केंद्र का मानदेय तत्काल जारी किया जाए। :-- शीला ठाकुर

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 तीन माह से लंबित केंद्र का मानदेय तत्काल जारी किया जाए। आंगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन ने राष्ट्रीय आह्वान पर आज प्रोजेक्ट नाहन  में आंगनवाड़ी केंद्रों की समस्याओं को उठाते हुए प्रोजेक्ट नाहन  महासचिव शीला ठाकुर की अध्यक्षता में  यूनियन का एक प्रतिनिधि मंडल  जिलाधीश सिरमौर  की माध्यम  से प्रधानमंत्री  को  निदेशक महिला  एवं  बाल विकास विभाग  को भेजा ,  प्रतिनिधि मंडल मे, जिला  सह सचिव सीता तोमर, मीरा  और आंगनवाड़ी  यूनियन की जिला कमेटी सदस्य बसन्ति, लता सुलोचना, सीमा रानी, पुष्पा  आदि शामिल  रहे, यूनियन ने केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान आंगनवाड़ी बहनों की लगातार बढ़ती समस्याओं की ओर आकर्षित किया। यूनियन के गंभीर आरोप 1. मातृत्व अवकाश पर अवैध “1 साल सेवा शर्त”  शीला  ठाकुर और सीता तोमर, बसंती ने कहा कि मातृत्व अवकाश को एक वर्ष की सेवा से जोड़ना मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 व संशोधन 2017 और संविधान अनुच्छेद 42 का उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट कहा— > “मातृत्व अवकाश पहले दिन से अधिकार है। ...

हिमाचल पटवारी भर्ती में एससी व गरीब वर्ग को फीस में राहत न देना — हिमाचल सरकार का आरक्षण विरोधी कदम :

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 हिमाचल पटवारी भर्ती में एससी व गरीब वर्ग को फीस में राहत न देना —  हिमाचल सरकार का आरक्षण  विरोधी कदम  :  हर वर्ग के बेरोजगार युवाओं के साथ है खिलवाड शोषण मुक्ति मंच शोषण मुक्ति मंच हिमाचल प्रदेश ने पटवारी भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जाति वर्ग एवं गरीब तबके को परीक्षा शुल्क में कोई राहत न दिए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। मंच का कहना है कि हर वर्ग के लिए 800 रुपये की समान फीस निर्धारण कर कमजोर तबकों को परीक्षा में बैठने से हतोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है, जो कि सामाजिक न्याय और आरक्षण की भावना के खिलाफ है। मंच के राज्य संयोजक आशीष कुमार एवं मिन्टा जिंटा, जगत राम, कर्मचंद  भाटिया, प्रीत पाल मट्टू, गोपाल  जिलटा, मनासा राम, नरेंद्र  विरुद्ध, विवेक कश्यप,  Er धरोच, ने संयुक्त बयान में कहा कि यह कदम सुखु सरकार द्वारा आरक्षण व्यवस्था को धीरे–धीरे खत्म करने की दिशा में पहला संकेत है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर, दलित और वंचित वर्ग पहले से ही संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं, ऐसे में भारी फीस लगाना उनके संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है...

तीन माह से लंबित केंद्र का मानदेय तत्काल जारी किया जाए।

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आंगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन ने राष्ट्रीय आह्वान पर आज प्रोजेक्ट पौंटा  साहिब में आंगनवाड़ी केंद्रों की समस्याओं को उठाते हुए प्रोजेक्ट संगडाह अध्यक्ष नीलम  जी  धन्यवन्ति ममता, पवन सत्या  शर्मा,लक्ष्मी, कला, सीमा, रीता,कमलेश,आदि  के नेतृत्व में एसडीएम संगडाह के माध्यम से प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को मांग-पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में  लगभग एक दर्जन कार्यकर्ता शामिल रहीं। यूनियन ने केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान आंगनवाड़ी बहनों की लगातार बढ़ती समस्याओं की ओर आकर्षित किया। यूनियन के गंभीर आरोप 1. मातृत्व अवकाश पर अवैध “1 साल सेवा शर्त” नीलम और धन्यवान्ति ने कहा कि मातृत्व अवकाश को एक वर्ष की सेवा से जोड़ना मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 व संशोधन 2017 और संविधान अनुच्छेद 42 का उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट कहा— > “मातृत्व अवकाश पहले दिन से अधिकार है। महिलाओं पर शर्तें थोपना महिला-विरोधी नीति है। इसे तुरंत रद्द किया जाए।” 2. आयुष्मान कार्ड के बाद हिम-केयर से वंचित करना गंभीर अन्याय सत्या शर्मा ने बताया कि आयुष्मान कार्ड बनने के बाद पुराने हिम...

अम्बेडकर: जन्म और महापरिनिर्वाण के बीच फैली वह रोशनी, जिसे आज की सरकारे बुझाने पर उतारू है*

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 *अम्बेडकर: जन्म और महापरिनिर्वाण के बीच फैली वह रोशनी, जिसे आज की सरकारे  बुझाने पर उतारू है*:-----आशीष कुमार, राज्य संयोजक  शोषण मुक्ति मंच  हि o प्र o 14 अप्रैल 1891 को जन्मे और 6 दिसंबर 1956 को महापरिनिर्वाण को प्राप्त बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर का जीवन हमें बराबरी, वैज्ञानिक चेतना और विद्रोही विवेक की वह मशाल देता है, जिसकी रोशनी में किसी भी सभ्य समाज को खुद को परखना चाहिए। पर आज का भारत एक अजीब उलटबाँसी का समय है—यह वह दौर है जब अम्बेडकर को मानना आसान है, पर अम्बेडकर को समझना और अपनाना लगभग अपराध जैसा बना दिया गया है। यही कारण है कि पूरे साल संघ और उसके  सहयोगियों ने अम्बेडकर को नये सिरे  से परिभाषित  करने का एक संगठित अभियान चलाया—उन्हें जाति-उन्मूलन के बजाय “सामाजिक समायोजन” का विचारक बताना, आरक्षण को ‘सीमा’ में बाँधने की माँग करना,  और संविधान को ‘अधिक स्वतंत्र’ घोषित करना इसी परियोजना के हिस्से थे। आज संविधान  लागू होने के बाद  वी. एन. राव  या अम्बेडकर जैसी बहस को जन्म देना  एक सोची समझी  साजिश  का हिस्सा...