हिमाचल सरकार अप्रैल 2026 से ₹1,000 की घोषित वृद्धि एरियर सहित जारी करे, केवल अधिसूचना नहीं अपना वादा पूरा करे सरकार

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हिमाचल सरकार अप्रैल 2026 से ₹1,000 की घोषित वृद्धि एरियर सहित जारी करे, केवल अधिसूचना नहीं अपना वादा पूरा करे सरकार जिला सिरमौर के पौंटा साहिब, नाहन, संगड़ाह, राजगढ़ और पच्छाद परियोजनाओं में 23 अक्टूबर को आंगनवाड़ी वर्करज एवं हेल्परज यूनियन संबंधित सीटू के आह्वान पर कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने मानदेय वृद्धि की अधिसूचना के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने हिमाचल सरकार से बजट में घोषित ₹1,000 की मानदेय वृद्धि अप्रैल 2026 से एरियर सहित लागू करने की मांग की। यूनियन नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बजट में अप्रैल 2026 से मानदेय वृद्धि की घोषणा की गई थी, लेकिन अब इसे 1 नवंबर 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी करना आंगनवाड़ी कर्मियों के साथ सरासर धोखा है। सरकार अपने ही बजट की घोषणा से पीछे हटकर हजारों आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों के आर्थिक हितों पर चोट कर रही है। महंगाई के इस दौर में मामूली मानदेय पर काम करने वाली कर्मियों को उनके हक से वंचित करना अन्यायपूर्ण है। नेताओं ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, टीकाकरण तथा महिला एवं बाल विकास से ...

हिमाचल पटवारी भर्ती में एससी व गरीब वर्ग को फीस में राहत न देना — हिमाचल सरकार का आरक्षण विरोधी कदम :

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हर वर्ग के बेरोजगार युवाओं के साथ है खिलवाड

शोषण मुक्ति मंच


शोषण मुक्ति मंच हिमाचल प्रदेश ने पटवारी भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जाति वर्ग एवं गरीब तबके को परीक्षा शुल्क में कोई राहत न दिए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। मंच का कहना है कि हर वर्ग के लिए 800 रुपये की समान फीस निर्धारण कर कमजोर तबकों को परीक्षा में बैठने से हतोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है, जो कि सामाजिक न्याय और आरक्षण की भावना के खिलाफ है।


मंच के राज्य संयोजक आशीष कुमार एवं मिन्टा जिंटा, जगत राम, कर्मचंद  भाटिया, प्रीत पाल मट्टू, गोपाल  जिलटा, मनासा राम, नरेंद्र  विरुद्ध, विवेक कश्यप,  Er धरोच, ने संयुक्त बयान में कहा कि यह कदम सुखु सरकार द्वारा आरक्षण व्यवस्था को धीरे–धीरे खत्म करने की दिशा में पहला संकेत है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर, दलित और वंचित वर्ग पहले से ही संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं, ऐसे में भारी फीस लगाना उनके संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है।


बैठक की  अध्यक्षता गोपाल जिलटा ने की। बैठक में जगत राम, प्रीत पाल मट्टू, कर्मचाँद भाटिया,सतपाल मान, नैन सिंह, संदीप भारती, कमल, राजबन नेगी,  इन्दर सिंह,मथरादास ,उजागर, नेक राम,तिलक राज सहित कई साथियों ने भाग लिया और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष को और तेज करने का संकल्प लिया।


बैठक में निर्णय लिया गया कि शोषण मुक्ति मंच का गठन पंचायत स्तर तक किया जाएगा, ताकि जमीनी स्तर पर सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूती मिल सके। मंच ने सरकार से मांग की कि सरकारी विभागों में होने वाली सभी भर्तियों—चाहे वे आउटसोर्स हों या वन मित्र, पशु मित्र, श्रमिक मित्र जैसी योजनाओं के तहत—में आरक्षण रोस्टर को सख्ती से लागू किया जाए और कमजोर वर्गों को परीक्षा शुल्क में समुचित राहत दी जाए।


शोषण मुक्ति मंच ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस जनविरोधी फैसले को वापस नहीं लिया, तो प्रदेश भर में व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा।


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