Posts

Showing posts from November, 2019

मजदूर दिवस और बुद्ध पूर्णिमा: श्रम, करुणा और न्याय का प्रश्न* :---- आशीष कुमार

Image
 *मजदूर दिवस और बुद्ध पूर्णिमा: श्रम, करुणा और न्याय का प्रश्न* :---- आशीष कुमार आशी आज एक ओर पूरी दुनिया मजदूर दिवस मना रही है, तो दूसरी ओर बुद्ध पूर्णिमा भी है। यह संयोग केवल कैलेंडर का नहीं, बल्कि विचारों का है—श्रम और करुणा, न्याय और मानव गरिमा के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है । मजदूर दिवस हमें उन हाथों की संघर्षों की  याद दिलाता है, जिन्होंने दुनिया को गढ़ा है। बुद्ध पूर्णिमा हमें उस चेतना की याद दिलाती है, जिसने मनुष्य को दुःख, असमानता और शोषण के कारणों को समझने और उनसे मुक्ति की दिशा दिखाई। मजदूर दिवस का ऐतिहासिक आधार भारत में पहली बार 1 मई 1923 को मजदूर दिवस मनाया गया था। इसके पीछे पूरी दुनिया में हुए मजदूर आंदोलनों की लंबी श्रृंखला थी, जिसकी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 1886 का शिकागो आंदोलन रहा, जहाँ 8 घंटे काम के अधिकार के लिए मजदूरों ने संघर्ष किया और अपने जीवन तक बलिदान कर दिए। यह इतिहास बताता है कि श्रम अधिकार कभी दया से नहीं मिले, बल्कि संघर्ष और संगठित शक्ति से प्राप्त हुए हैं। परन्तु  आज का सवाल भी यही है  क्या मजदूर की स्थिति बदली है?  लगभग एक सदी के...

समाजिक शोषण के खिलाफ वामपंथ की भूमिका ____ आशीष कुमार आशी

आजादी के 72 वर्षों के बाद जो सपना सविधान निर्माता अम्बेडकर जी ने देखा था सरदार भगत सिंह , सुभाष चन्द्र बोस ने देखा था  या जिस भारत को  बनाने का वादा आजकल के नेता अपने खोखले भाषणों में करते है  क्या वे भारत हम बना पाए है या नहीं , परन्तु हाल ही  में पिछले 7 वर्षों और आजादी के बाद कोई भी   सरकारे रही है उन सभी सरकारों और उनके नेताओं की कटघरे में खड़ा करने की जरूरत भी है ,परन्तु अम्बेडकर जयंती, भगत सिंह जयंती  में मालार्पण करने हम खास कर इन्हीं लोगों को बुलाते है जिनको इस देश के संविधान से कोई खास लगाव नही  अपितु वह लोग हर जगह संविधान की धज्जियां  और कदम कदम पर भगत सिंह के विचारों की धाजिया उड़ाते रहते है। जोकि आपने हाल ही के महीनों में देखा भी है, जाने अनजाने हम किसी न किसी रूप में  उन लोंगो को ही  बढ़ावा दे रहे है जो कि अम्बेडकर  , सरदार भगत सिंह  के विचारों से कोई वास्ता नही रखते है या ऐसा कह सकते है कि भगत सिंह और  बाबा साहब की विचारधारा से विपरीत है, मुझे यँहा विचारों की क्या विषमताएं है  कुछ पंक्तियन का जिक्र ...