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मजदूरों के न्यूनतम वेतन पर फैसला, लेकिन प्रमुख ट्रेड यूनियनें ही बोर्ड से बाहर!

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 मजदूरों के न्यूनतम वेतन पर फैसला, लेकिन प्रमुख ट्रेड यूनियनें ही बोर्ड से बाहर! ________________________________________________ मजदूरों के न्यूनतम वेतन पर फैसला, लेकिन प्रमुख ट्रेड यूनियनें ही बोर्ड से बाहर! सीटू, एटक और इंटक को न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड से बाहर रखना मजदूर-विरोधी पक्षपात: सीटू सीटू ने मोदी सरकार के कदम की निंदा की, देशव्यापी प्रतिरोध की तैयारी का आह्वान नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पुनर्गठित केंद्रीय न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड में देश की प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों को प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने का सीटू ने कड़ा विरोध किया है। सीटू ने इसे सरकार का स्पष्ट मजदूर-विरोधी और पक्षपातपूर्ण रवैया करार देते हुए देशभर के मजदूरों और ट्रेड यूनियनों से इसके खिलाफ आवाज बुलंद करने का आह्वान किया है। केंद्र सरकार ने 21 जुलाई 2026 को केंद्रीय न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड का पुनर्गठन कर अधिसूचना जारी की, जिसे सार्वजनिक रूप से काफी बाद में उपलब्ध कराया गया। हैरानी की बात यह है कि देश की प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों में शामिल सीटू, एटक और इंटक को इस बोर्ड में प्रतिनिधित्...

1 दिसम्बर को ऐतिहासिक मजदूर प्रतिरोध — महंगाई, स्मार्ट मीटर और श्रम अधिकारों पर होगा संघर्ष

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https://www.facebook.com/share/p/19RJYj7fpp/ मजदूर घेरेंगे दिल्ली, हिमाचल से हजारों की हुंकार ________________________________________ 1 दिसम्बर को ऐतिहासिक मजदूर प्रतिरोध — महंगाई, स्मार्ट मीटर और श्रम अधिकारों पर होगा संघर्ष ______________________________ शिमला। सीटू हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी की शिमला में राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा की अध्यक्षाता में बैठक  हुई, बैठक में 1 दिसम्बर 2026 को दिल्ली में होने वाले “मजदूरों! घेरो दिल्ली” कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हिमाचल से हजारों मजदूरों को लामबंद करने का निर्णय लिया गया। बैठक में  महासचिव प्रेम गौतम ने तैयारियों की रूपरेखा प्रस्तुत की। सीटू राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर भी बैठक में मौजूद रहे।  सीटू नेताओं ने कहा कि देशभर से एक लाख से अधिक मजदूर वॉलंटियर्स दिल्ली पहुंचेंगे। हिमाचल के मजदूरों से 30 नवम्बर तक दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया गया है, ताकि 1 दिसम्बर को सुबह 10 बजे होने वाले मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, रोजगार की असुरक्षा और श्रमिक अधिकारों पर हमले आम जनता और मजदूर वर्ग...

जब बराबरी खटकने लगे ,तो आरक्षण निशाने पर क्यों ?*

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 *जब बराबरी खटकने लगे ,तो आरक्षण निशाने पर क्यों ?* — आशीष कुमार ‘आशी’ आरक्षण को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज है। आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन हो रहे हैं। इस आंदोलन में शामिल युवाओं की बेचैनी को समझना भी जरूरी है। आखिर जब एक गरीब परिवार का बच्चा महंगी शिक्षा, कोचिंग और प्रतियोगिता की दौड़ में पीछे रह जाता है, तो उसके मन में व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। लेकिन हमें एक सवाल ईमानदारी से खुद से पूछना होगा ,क्या इस समस्या का समाधान किसी दूसरे गरीब के हिस्से का अधिकार कम करने में है? मेरे विचार से इसका जवाब साफ है—नहीं। एक गरीब परिवार का बच्चा चाहे किसी भी जाति से हो, उसकी परेशानी वास्तविक है। जिसके घर में दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो, उसके लिए महंगी शिक्षा और कोचिंग किसी पहाड़ से कम नहीं। इसलिए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा, छात्रवृत्ति, कोचिंग और रोजगार के विशेष अवसर बढ़ाए जाने चाहिए। लेकिन यहां एक बुनियादी बात समझना जरूरी है—आरक्षण केवल गरीबी दूर करने की योजना नहीं है। भारत में जाति केवल आर्थिक स्थिति का नाम नहीं रही। सदियों तक...

आँगनवाड़ी कर्मियों की मांगों को लेकर निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग से वार्ता, कई मांगों पर बनी सहमति*

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 *आँगनवाड़ी कर्मियों की मांगों को लेकर निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग से वार्ता, कई मांगों पर बनी सहमति* ________________________ शिमला। आँगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन की राज्य कमेटी की ओर से 8 जून की हड़ताल के प्रथम चरण के तहत आज महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में यूनियन की ओर से सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर, आँगनवाड़ी यूनियन की राज्य अध्यक्ष नीलम जसवाल, राज्य महासचिव वीना शर्मा, बिमला, सुषमा, अनुराधा सहित राज्य कमेटी के सात सदस्यों ने भाग लिया। बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए यूनियन की राज्य महासचिव वीना शर्मा ने कहा कि बैठक में आँगनवाड़ी कर्मियों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विभाग ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि आँगनवाड़ी कर्मियों को ग्रेच्युटी देने के लिए स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेज दिया गया है। स्वीकृति प्राप्त होते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। इसके अलावा लंबे समय से लंबित सुपरवाइजर भर्ती प्रक्रिया को जल्द शुरू करने का आश्वासन भी विभाग की ओर स...

हिमाचल के पुलिस महानिदेशक को पद से हटाने की माँग को लेकर राज्यपाल से मिला दलित शोषण मुक्ति मंच

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 *DSP विजय कुमार प्रकरण की स्वतंत्र जांच हो, DGP को पद से हटाया जाए : दलित शोषण मुक्ति मंच* __________________________  दलित शोषण मुक्ति मंच के राज्य संयोजक जगत राम एवं राज्य सह-संयोजक आशीष कुमार के नेतृत्व में आज एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल महोदय से मुलाकात कर अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। प्रतिनिधिमंडल में विवेक कश्यप, सतपाल मान, नरेश कुमार, निशा, नोख राम, ओम प्रकाश आदि शामिल रहे। मीडिया को संबोधित करते हुए जगत राम एवं आशीष कुमार ने कहा कि उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) शिमला श्री विजय कुमार द्वारा उठाया गया जातिगत उत्पीड़न का मामला गंभीर है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा इस मामले में DGP तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं सतर्कता) को तलब किया गया है। ऐसे में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए DGP को तत्काल वर्तमान पद से हटाया जाए और विजय कुमार की शिकायत की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच ऐसी एजेंसी से करवाई जाए जो DGP के प्रशासनिक नियंत्रण में न हो। उन्होंने कहा कि चंबा-चुराह प्रकरण में चुराह उत्सव के दौरान स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत क...

हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार: आधुनिक हिमाचल की नींव रखने वाले युगदृष्टा — आशीष कुमार

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जब भी हिमाचल प्रदेश के निर्माण और विकास की चर्चा होगी, सबसे पहला नाम डॉ. यशवंत सिंह परमार का लिया जाएगा। उन्हें केवल हिमाचल प्रदेश का प्रथम मुख्यमंत्री कहना उनके व्यक्तित्व और योगदान को सीमित कर देना होगा। वे उस विचार के जनक थे जिसने बिखरे हुए पहाड़ी क्षेत्रों को एक सशक्त, आत्मसम्मानी और विकासोन्मुख राज्य के रूप में स्थापित किया। आधुनिक हिमाचल जिस मजबूत नींव पर आज खड़ा है, उस नींव का प्रत्येक आधार-स्तंभ डॉ. परमार की दूरदर्शिता, संघर्ष और विकास-दृष्टि का परिणाम है। इसलिए उन्हें "हिमाचल निर्माता" कहा जाता है। 4 अगस्त केवल एक महान नेता की जयंती नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति के विचारों को याद करने का अवसर है जिसने सत्ता को साधन माना, लक्ष्य नहीं। जिसने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया और जिसने हिमाचल के विकास की शुरुआत गांव, किसान और पंचायत से की। डॉ. यशवंत सिंह परमार का जन्म सिरमौर जिले के चनहालग क्षेत्र की लाना बाका पंचायत में हुआ। पहाड़ की कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े डॉ. परमार ने बचपन से ही ग्रामीण जीवन की चुनौतियों को देखा और समझा। यही अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीति और विकास की ...

मजदूर दिवस और बुद्ध पूर्णिमा: श्रम, करुणा और न्याय का प्रश्न* :---- आशीष कुमार

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 *मजदूर दिवस और बुद्ध पूर्णिमा: श्रम, करुणा और न्याय का प्रश्न* :---- आशीष कुमार आशी आज एक ओर पूरी दुनिया मजदूर दिवस मना रही है, तो दूसरी ओर बुद्ध पूर्णिमा भी है। यह संयोग केवल कैलेंडर का नहीं, बल्कि विचारों का है—श्रम और करुणा, न्याय और मानव गरिमा के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है । मजदूर दिवस हमें उन हाथों की संघर्षों की  याद दिलाता है, जिन्होंने दुनिया को गढ़ा है। बुद्ध पूर्णिमा हमें उस चेतना की याद दिलाती है, जिसने मनुष्य को दुःख, असमानता और शोषण के कारणों को समझने और उनसे मुक्ति की दिशा दिखाई। मजदूर दिवस का ऐतिहासिक आधार भारत में पहली बार 1 मई 1923 को मजदूर दिवस मनाया गया था। इसके पीछे पूरी दुनिया में हुए मजदूर आंदोलनों की लंबी श्रृंखला थी, जिसकी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 1886 का शिकागो आंदोलन रहा, जहाँ 8 घंटे काम के अधिकार के लिए मजदूरों ने संघर्ष किया और अपने जीवन तक बलिदान कर दिए। यह इतिहास बताता है कि श्रम अधिकार कभी दया से नहीं मिले, बल्कि संघर्ष और संगठित शक्ति से प्राप्त हुए हैं। परन्तु  आज का सवाल भी यही है  क्या मजदूर की स्थिति बदली है?  लगभग एक सदी के...

पंचायती राज संस्थाओं में क्या प्रतिनिधित्व सिर्फ दिखावा है, या फैसले लेने की ताकत सच में बदली है?*”

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 *पंचायती राज संस्थाओं में क्या प्रतिनिधित्व सिर्फ दिखावा है, या फैसले लेने की ताकत सच में बदली है?*” आशीष कुमार आशी ______________________________________________ हिमाचल प्रदेश में देर से ही सही  मगर पंचायती राज चुनाव का बिगुल बज चुका है ,इस प्रक्रिया. को पुरा करने से पहली सबसे बड़ी चुनौती जो होती है.  रोस्टर प्रणाली  जो  की हमारे पंचायती राज अधिनियम् 1994 के तहत तय किया जाता है और यह हमारे संविधान के 73 वें संशोधन के अनुरूप है । इस संशोधन  से   पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य स्पष्ट था दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्गों और महिलाओं को स्थानीय सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित करना। कागज़ों पर यह व्यवस्था लोकतंत्र को गहराई देती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कई स्थानों पर इसकी प्रभावशीलता सीमित नजर आती है। पंचायतों में सीटें आरक्षित जरूर हैं, पर वास्तविक निर्णय लेने की प्रक्रिया कई बार कुछ सीमित हाथों में सिमटी हुई दिखाई देती है। गांवों में “भाईचारा” और “सहमति” के नाम पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की प्रवृत्ति भी सामने आती है। कई बार उम्...

पंचायती राज को मजबूत करने व जनता के मुद्दों को लेकर जिला परिषद से शहरी निकाय तक हस्तक्षेप करेगी सीपीएम”

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 पंचायती राज को मजबूत करने व जनता के मुद्दों को लेकर जिला परिषद से शहरी निकाय तक हस्तक्षेप करेगी सीपीएम नाहन, दिनांक — आगामी पंचायत एवं शहरी निकाय चुनावों को लेकर आज सीपीएम जिला केंद्र की एक महत्वपूर्ण बैठक नाहन में आयोजित की गई। बैठक में स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई और यह निर्णय लिया गया कि पार्टी इन चुनावों में जनता की जमीनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए सक्रिय हस्तक्षेप करेगी। बैठक में यह भी तय किया गया कि चुनावों के माध्यम से जनविरोधी नीतियों को उजागर किया जाएगा, जिनके कारण आम जनता के जीवन पर लगातार नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण स्तर पर लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत संचालित मनरेगा को कमजोर किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि इससे आने वाले समय में ग्रामीण रोजगार और गांवों के विकास पर गंभीर असर पड़ेगा। बैठक में यह भी सामने आया कि जिले में कृषि, बागवानी और दुग्ध उत्पादन से बड़ी आबादी जुड़ी होने के बावजूद इन क्षेत्रों के विकास के लिए ठोस नीतिगत प्रावधानों का अभाव है। ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक सेवाओं की स्थि...