पंचायती राज संस्थाओं में क्या प्रतिनिधित्व सिर्फ दिखावा है, या फैसले लेने की ताकत सच में बदली है?*”
*पंचायती राज संस्थाओं में क्या प्रतिनिधित्व सिर्फ दिखावा है, या फैसले लेने की ताकत सच में बदली है?*” आशीष कुमार आशी ______________________________________________ हिमाचल प्रदेश में देर से ही सही मगर पंचायती राज चुनाव का बिगुल बज चुका है ,इस प्रक्रिया. को पुरा करने से पहली सबसे बड़ी चुनौती जो होती है. रोस्टर प्रणाली जो की हमारे पंचायती राज अधिनियम् 1994 के तहत तय किया जाता है और यह हमारे संविधान के 73 वें संशोधन के अनुरूप है । इस संशोधन से पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य स्पष्ट था दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्गों और महिलाओं को स्थानीय सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित करना। कागज़ों पर यह व्यवस्था लोकतंत्र को गहराई देती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कई स्थानों पर इसकी प्रभावशीलता सीमित नजर आती है। पंचायतों में सीटें आरक्षित जरूर हैं, पर वास्तविक निर्णय लेने की प्रक्रिया कई बार कुछ सीमित हाथों में सिमटी हुई दिखाई देती है। गांवों में “भाईचारा” और “सहमति” के नाम पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की प्रवृत्ति भी सामने आती है। कई बार उम्...