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Showing posts from July, 2025

हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार: आधुनिक हिमाचल की नींव रखने वाले युगदृष्टा — आशीष कुमार

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जब भी हिमाचल प्रदेश के निर्माण और विकास की चर्चा होगी, सबसे पहला नाम डॉ. यशवंत सिंह परमार का लिया जाएगा। उन्हें केवल हिमाचल प्रदेश का प्रथम मुख्यमंत्री कहना उनके व्यक्तित्व और योगदान को सीमित कर देना होगा। वे उस विचार के जनक थे जिसने बिखरे हुए पहाड़ी क्षेत्रों को एक सशक्त, आत्मसम्मानी और विकासोन्मुख राज्य के रूप में स्थापित किया। आधुनिक हिमाचल जिस मजबूत नींव पर आज खड़ा है, उस नींव का प्रत्येक आधार-स्तंभ डॉ. परमार की दूरदर्शिता, संघर्ष और विकास-दृष्टि का परिणाम है। इसलिए उन्हें "हिमाचल निर्माता" कहा जाता है। 4 अगस्त केवल एक महान नेता की जयंती नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति के विचारों को याद करने का अवसर है जिसने सत्ता को साधन माना, लक्ष्य नहीं। जिसने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया और जिसने हिमाचल के विकास की शुरुआत गांव, किसान और पंचायत से की। डॉ. यशवंत सिंह परमार का जन्म सिरमौर जिले के चनहालग क्षेत्र की लाना बाका पंचायत में हुआ। पहाड़ की कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े डॉ. परमार ने बचपन से ही ग्रामीण जीवन की चुनौतियों को देखा और समझा। यही अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीति और विकास की ...

हमीरपुर के बड़सर में अनुसूचित जाति वर्ग को अंतिम संस्कार करने से रोकना शर्मनाक

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  दलित शोषण मुक्ति मंच, जिला  सिरमौर   हमीरपुर जिले के बड़सर में कड़सई  पंचायत में  एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति के अंतिम संस्कार को लेकर हुए विवाद की निंदा करते हैं। मंच के संयोजक आशीष कुमार , सह संयोजक अमिता चौहन,  जिला कमेटी सदस्य राजेश तोमर,सतपाल मान,जगदीश पुंडीर,नैन सिंह ,अनिता,अमर चंद ने कहा की  यह घटना मुख्यमंत्री के गृह जिले में होना शर्मनाक है जो समाज में व्याप्त जातिवादी मानसिकता को दर्शाती है। आहीश कुमार ने कहा की ये मात्र एक घटना  एक हमीरपुर की है नही है बल्कि हिमाचल प्रदेश में आज भी अनुसूचित जाति वर्ग मे लोग  प्रतिदिन इस तरह के शोषण के शिकार होते रहते है । कभी शादी विवाह में अपमानित  किया जाता है तो कभी  स्कूल परिसर  मे छात्रों  तक को अपमानित किया जाता है , दलित शोषण मुक्ति मंच ने कहा की अनुसूचित जाति वर्ग को जीते जी तो अपमान झेलना हि पड़ता है परन्तु मरणोपरान्त भी  संस्कार के लिए जमीन उपलब्ध नहीं होती। आशीष कुमार ने स्थानीय sdm  का ब्यान जिसमे कहा गया है की गाँव के लिए अलग शमशान घाट बनाया जायेगा ये ...

हिमाचल प्रदेश में मजदूरों और किसानों की एकता: एक नई दिशा की ओर* आशीष कुमार (हि०प्र०)

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 *हिमाचल प्रदेश में मजदूरों और किसानों की एकता: एक नई दिशा की ओर*              आशीष कुमार (हि०प्र०)  भारी बारिश और खराब रास्स्तों के चलते 9 जुलाई की   राष्ट्रवायापी हड़ताल के आहवाहन  पर  हिमाचल प्रदेश में मजदूरों और किसानों की एकता ने एक बार फिर से अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है।  हाल ही में हुई प्रदेशव्यापी हड़ताल में हजारों मजदूरों और किसानों ने भाग लिया, जो केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट हुए हैं। इस ऐतिहासिक  हड़ताल में मजदूर वर्ग हिमाचल के हर जिला और तहसील मुख्यालय पर इस हड़ताल का हिस्सा बने, हिमाचल प्रदेश के जिला मुख्यालयों और राजधानी  में चार लेबर  कोड के विरोध में  हजार्रो की संख्या में अलग अलग यूनियन से लोग हड़ताल में उतरे पूरे राज्य में लाल झंडो और सीटू के बैनर तले, आंगनबाड़ी ,मिड डे  मील वर्करज, निर्माण, मनरेगा मजदूर, हाइडल  का मजदूर, आउटसोर्स कर्मी, रेहड़ी फड़ी, मेडिकल कॉलेज,,108/102 कर्मचारी यूनियन, हिमाचल किसान सभा,जनवादी महिला समिति, दलित शोषण मुक्ति मंच आदि...