Posts

Showing posts from June, 2022

दीयों की रोशनी में दिखाई देते अंधेरे — आशीष कुमार ‘आशी’

Image
 दीयों की रोशनी में दिखाई देते अंधेरे — आशीष कुमार ‘आशी’ सेवा संकल्प और विकास के प्रतीक के रूप में 17 सितम्बर  प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर देशभर में दीये जलाए गए। हर जगह  रोशनी हुई, उत्सव हुआ, तस्वीरें खिंचीं और इसे सेवा, संकल्प और विकास का प्रतीक बताया गया। लेकिन कभी-कभी बहुत ज्यादा रोशनी भी उन सवालों को और साफ कर देती है, जिन्हें हम अंधेरे में छिपा देना चाहते हैं। सत्ता के उत्सव और जनता की जिंदगी के बीच का यह फासला जितना चमकदार बनाया जाता है, उतना ही तीखा दिखाई देता है।  2014 से और आज तक बहुत कुछ बदला है , या फिर ऐसा दर्शाने की कोशिश हुई है की देश की शुरुवात सही मायने में 2014 में हुई  और धीरे धीरे शायद यदि जनता की  आँखे ऐसे ही इन  दियों से चोंधियाती रही तो शायद ये भी सम्भव है की 17 सितम्बर 1950 में गुजरात के  वडनगर में मोदी जी का जन्म हुआ शायद उसे चार धामों की तरह पाँचवे धाम में ना बताना शुरु कर दे,  परन्तु  आज उन्हीं दीयों की लौ को देखते हुए एक मजदूर पूछ रहा है—मेरी मेहनत की न्यूनतम कीमत आखिर कब तय होगी? काम के सही दाम , समान काम का ...

जनजातीय क्षेत्र की सुगबुगाहट के बीच अनुसूचित जाति और obc वर्ग की चिंताएं*

Image
  जनजातीय क्षेत्र की सुगबुगाहट के बीच अनुसूचित जाति और obc वर्ग की चिंताएं                                      --------- -आशीष  कुमार ---------                                       सरकार के मिशन रिपीट की तैयारियों के चलते प्रदेश के जिला सिरमौर के ट्रंसगिरि क्षेत्र के अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के चेहरे पर एक अनकही चिंताओं को बढ़ा दिया है , जिसका जिक्र कुछ अनुसचित जाति वर्ग के बुद्धिजीवी कर रहे है , परन्तु इन 154 पंचायतों में जो इस वर्ग की चिंता है वो किसी से छुपी नही है । मगर सरकारों और  तथाकतीत सभ्य समाज के सामने ये चिंताए अदृश्य ही रहती है , या तो वो लोग इसको जान कर अदृश्य करते है या फ़िर शोषण कारी व्यवस्था को कायम रखने के लिए ये ऐसा करना आवश्यक समझते है। जब हम इस विषय पर विश्लेषण कर रहे है तो हमको सबसे पहले ये जानना जरुरी है कि जिस विषय मे ये बात चल रही है सही मायने में वो है क्या...