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Showing posts from June, 2022

मजदूर दिवस और बुद्ध पूर्णिमा: श्रम, करुणा और न्याय का प्रश्न* :---- आशीष कुमार

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 *मजदूर दिवस और बुद्ध पूर्णिमा: श्रम, करुणा और न्याय का प्रश्न* :---- आशीष कुमार आशी आज एक ओर पूरी दुनिया मजदूर दिवस मना रही है, तो दूसरी ओर बुद्ध पूर्णिमा भी है। यह संयोग केवल कैलेंडर का नहीं, बल्कि विचारों का है—श्रम और करुणा, न्याय और मानव गरिमा के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है । मजदूर दिवस हमें उन हाथों की संघर्षों की  याद दिलाता है, जिन्होंने दुनिया को गढ़ा है। बुद्ध पूर्णिमा हमें उस चेतना की याद दिलाती है, जिसने मनुष्य को दुःख, असमानता और शोषण के कारणों को समझने और उनसे मुक्ति की दिशा दिखाई। मजदूर दिवस का ऐतिहासिक आधार भारत में पहली बार 1 मई 1923 को मजदूर दिवस मनाया गया था। इसके पीछे पूरी दुनिया में हुए मजदूर आंदोलनों की लंबी श्रृंखला थी, जिसकी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 1886 का शिकागो आंदोलन रहा, जहाँ 8 घंटे काम के अधिकार के लिए मजदूरों ने संघर्ष किया और अपने जीवन तक बलिदान कर दिए। यह इतिहास बताता है कि श्रम अधिकार कभी दया से नहीं मिले, बल्कि संघर्ष और संगठित शक्ति से प्राप्त हुए हैं। परन्तु  आज का सवाल भी यही है  क्या मजदूर की स्थिति बदली है?  लगभग एक सदी के...

जनजातीय क्षेत्र की सुगबुगाहट के बीच अनुसूचित जाति और obc वर्ग की चिंताएं*

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  जनजातीय क्षेत्र की सुगबुगाहट के बीच अनुसूचित जाति और obc वर्ग की चिंताएं                                      --------- -आशीष  कुमार ---------                                       सरकार के मिशन रिपीट की तैयारियों के चलते प्रदेश के जिला सिरमौर के ट्रंसगिरि क्षेत्र के अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के चेहरे पर एक अनकही चिंताओं को बढ़ा दिया है , जिसका जिक्र कुछ अनुसचित जाति वर्ग के बुद्धिजीवी कर रहे है , परन्तु इन 154 पंचायतों में जो इस वर्ग की चिंता है वो किसी से छुपी नही है । मगर सरकारों और  तथाकतीत सभ्य समाज के सामने ये चिंताए अदृश्य ही रहती है , या तो वो लोग इसको जान कर अदृश्य करते है या फ़िर शोषण कारी व्यवस्था को कायम रखने के लिए ये ऐसा करना आवश्यक समझते है। जब हम इस विषय पर विश्लेषण कर रहे है तो हमको सबसे पहले ये जानना जरुरी है कि जिस विषय मे ये बात चल रही है सही मायने में वो है क्या...