भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

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*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

दलित शोषण मुक्ति मंच ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा

 *दलित शोषण मुक्ति मंच सिरमौर*


सेवा में

        महामहिम राष्ट्रपति

        भारत गणराज्य राष्ट्रपति भवन

        नई दिल्ली 110011


 विषय:---  ज्ञापन


श्रीमान जी, 

             हिमाचल प्रदेश  दलित शोषण मुक्ति मंच   आपका ध्यान अभी हाल ही में 14 सितंबर 2020 को उत्तरप्रदेश के हाथरस में 19 वर्षीय दलित लड़की के साथ हुए अमानवीय दुष्कृत्य की तरफ आकर्षित करना चाहते है।  14 सितम्बर 2020 की सुबह कुछ स्वर्ण जाति के लोगों द्वारा दलित समाज की एक युवा लड़की के साथ बलात्कार किया गया और उसके पश्चात उसकी रीढ़ की हड्डी को तोड़ा गया दरिंदगी से उसका गला दबा कर उसकी जीभ को काट दिया गया  जिसके चलते 29 सितम्बर को पीड़िता की मौत हो जाती है  ।  उतर प्रदेश की अमानविय  सरकार की संवेदन हीनता के  चलते पीड़िता के परिवार को उसके पार्थिव शरीर न सौंप कर एक दलित परिवार अपनी पुत्री का अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाया। जोकि उतर प्रदेश की  योगी सरकार और वर्तमान में विश्वगुरु बनने का दम्ब भरने वाली सरकार के शासन काल मे हुआ ।श्रीमान जी आज पूरे देश के अंदर दलित शोषण मुक्ति मंच ये विरोध प्रदर्शन कर रहा है क्योंकि आज देश में   आजादी के 73 वर्षों बाद भी न्याय के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है।  दलित समाज की इस बेटी के साथ हुए इस अमानवीय घटना के बाद भी  उत्तर प्रदेश की सरकार में इस दलित लड़की  की प्राथमिकी दर्ज होने में पुलिस ने  8 दिन लागये। पुलिस के अधिकारियों ने जिस तरह से इस केस को रजिस्टर कर ने में लापरवाही दिखाई है उन अधिकारियों  का एक महिला के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है  ये साफ दर्शाता है कि सरकार का पूरा का पूरा तंत्र उतरप्रदेश में असमाजिक तत्वों के साथ खड़ी है।एक ही देश मे रह रही जनता को  दोगली निगाह से देखती है , जिसमे दलित गरीब लोगों के प्रति और नजरिया और अमीर वर्ग और उच्च जाति के प्रति अलग नजरिया, इस तरह का नजरिया राम राज्य की कल्पना करने और विश्वगुरु बनने का सपना देखने वाले देश की सरकारों के लिए बेहद शर्मनाक है , आज देश और   उतर प्रदेश की कानून व्यवस्था सन्देह के दायरे में है दलित समाज के लोगों को इन सरकारों से उम्मीद न के बराबर रह गई है।

श्रीमान जी हम आपसे निवेदन करते है कि उत्तर प्रदेश की सरकार पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए । जिला हाथरस के एस पी और  डी एम को गलत व झूठी बयान बाजी करने के लिए तुरन्त बर्खास्त किया जाए । दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए।उतर प्रदेश के मुख्यमंत्री को इस दुष्कृत्य के लिए बराबर का दोषी समझ कर तत्काल उनके पद से हटाया जाए क्योंकि उनके पद पर रहते इस लडकी के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद नही की जा सकती।

              धन्यवाद



संयोजक:::


 दलित शोषण मुक्ति मंच  सिरमौर_---__आशीष कुमार


जनवादी महिला समिति:--- संतोष कपूर

हिमाचल प्रदेश  


सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन हिमाचल :---- राजेंदर सिंह


भारत की जनवादी नौजवान सभा:--- विनोद


स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया  हिमाचल प्रदेश:--- राहुल शर्मा


हिमाचल प्रदेश कोली समाज:---संजय पुंडीर


नावजीवन बाल्मीकि समाज नाहन:---- श्याम लाल सोढ़ा


बाल्मीकि सभा हिमाचल प्रदेश:---- अचपाल सिंह


हिमाचल किसान सभा:---- सतपाल मान


मान्या महिला मण्डल नाहन:--- सरोज भारती


सन्त रविदास सभा नाहन:---- महेन्द्रों देवी


 अध्य्क्ष युवा विकास क्लब नाहन:-- हरीश कल्याण


अखिलभारतीय बाल्मीकि धर्म विकास सभा:--/ रिंकू बाला

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