Posts

Showing posts from November, 2019

भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

Image
*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

समाजिक शोषण के खिलाफ वामपंथ की भूमिका ____ आशीष कुमार आशी

आजादी के 72 वर्षों के बाद जो सपना सविधान निर्माता अम्बेडकर जी ने देखा था सरदार भगत सिंह , सुभाष चन्द्र बोस ने देखा था  या जिस भारत को  बनाने का वादा आजकल के नेता अपने खोखले भाषणों में करते है  क्या वे भारत हम बना पाए है या नहीं , परन्तु हाल ही  में पिछले 7 वर्षों और आजादी के बाद कोई भी   सरकारे रही है उन सभी सरकारों और उनके नेताओं की कटघरे में खड़ा करने की जरूरत भी है ,परन्तु अम्बेडकर जयंती, भगत सिंह जयंती  में मालार्पण करने हम खास कर इन्हीं लोगों को बुलाते है जिनको इस देश के संविधान से कोई खास लगाव नही  अपितु वह लोग हर जगह संविधान की धज्जियां  और कदम कदम पर भगत सिंह के विचारों की धाजिया उड़ाते रहते है। जोकि आपने हाल ही के महीनों में देखा भी है, जाने अनजाने हम किसी न किसी रूप में  उन लोंगो को ही  बढ़ावा दे रहे है जो कि अम्बेडकर  , सरदार भगत सिंह  के विचारों से कोई वास्ता नही रखते है या ऐसा कह सकते है कि भगत सिंह और  बाबा साहब की विचारधारा से विपरीत है, मुझे यँहा विचारों की क्या विषमताएं है  कुछ पंक्तियन का जिक्र ...