जाति का दर्द नही झेला. इसलिए आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*:--आशीष कुमार

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 *जाति का दर्द नही झेला. इसलिए  आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*  *गरीबी नहीं, सामाजिक भेदभाव है असली कारण*           ( आशीष कुमार. राज्य संयोजक शोषण मुक्ति मंच ) शांता कुमार  द्वारा कुछ दिन पूर्व दिये ब्यान में  यह कहना कि देश में आरक्षण का आधार जाति नहीं बल्कि केवल गरीबी होना चाहिए, न तो कोई नया तर्क है और न ही यह भारतीय समाज की वास्तविकता को समझने वाला दृष्टिकोण है। सच यह है कि भारत में आरक्षण की व्यवस्था गरीबी दूर करने के लिए नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे जातिगत भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और अवसरों की असमानता को दूर करने के लिए बनाई गई थी। भारत का संविधान, जिसे B. R. Ambedkar जैसे महान समाज सुधारकों ने गढ़ा, इस सच्चाई को स्वीकार करता है कि कुछ जातियों को केवल आर्थिक रूप से नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी दबाया गया। इसलिए आरक्षण सामाजिक न्याय का एक संवैधानिक उपाय है, न कि कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम। अगर आरक्षण को केवल आर्थिक आधार से जोड़ने की बात की जाती है, तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि EWS आरक्षण पर शांता कुमार जैसे नेता अक्सर खाम...

मेरी लड़ाई तो अंधेरे से है= = पंकज तन्हा

इस देश मे मूर्खों की कमी नहीं.. न भी ढूंढो तो हजारों मिलते हैं..।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इस देश की जनता से आपातकाल में सेवा दे रहे लोगों की हौंसला अफजाई के लिए

घर  के दरवाजे पर खड़े होकर थाली बजाने औऱ दीपक या मोमबत्ती जलाने का आह्वान करते हैं।

उनका मकसद केवल इतना रहता है कि आपातकाल में दिन रात सेवा दे रहे लोगों को महसूस हो कि इस देश के लोगों को उनपर गर्व है वो भी उनके साथ हैं।

 लेकिन मूर्खों की जमात उनके इस प्रयास पर तब पानी फेर देती है जब

मूर्ख अपने अपने तर्क देने लगते हैं

कोई कहता है थाली बजाने से उत्पन्न हुई तरंगों से कीटाणु मर जाएंगे। कोई नासा का तो कोई धर्म ग्रंथो का उदाहरण देने लगता है। कोई बताता है कि एक मोमबत्ती या दीपक कितनी ऊर्जा पैदा करता है। इस ऊर्जा से क्या होगा।

औऱ भी न जाने क्या क्या..?

इन मूर्खो की जमात के कारण कुछ हो न हो लेकिन प्रधानमंत्री जो सोच लेकर आये हैं उसपर वह पानी जरूर फेर देते हैं।

उनका मख़ौल बना कर छोड़ देते हैं।

 धन्य है ये जमात

मेरी लड़ाई तो अंधेरों से है
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ है

शब्द तलवार है

पंकज तन्हा

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