जाति का दर्द नही झेला. इसलिए आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*:--आशीष कुमार

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 *जाति का दर्द नही झेला. इसलिए  आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*  *गरीबी नहीं, सामाजिक भेदभाव है असली कारण*           ( आशीष कुमार. राज्य संयोजक शोषण मुक्ति मंच ) शांता कुमार  द्वारा कुछ दिन पूर्व दिये ब्यान में  यह कहना कि देश में आरक्षण का आधार जाति नहीं बल्कि केवल गरीबी होना चाहिए, न तो कोई नया तर्क है और न ही यह भारतीय समाज की वास्तविकता को समझने वाला दृष्टिकोण है। सच यह है कि भारत में आरक्षण की व्यवस्था गरीबी दूर करने के लिए नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे जातिगत भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और अवसरों की असमानता को दूर करने के लिए बनाई गई थी। भारत का संविधान, जिसे B. R. Ambedkar जैसे महान समाज सुधारकों ने गढ़ा, इस सच्चाई को स्वीकार करता है कि कुछ जातियों को केवल आर्थिक रूप से नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी दबाया गया। इसलिए आरक्षण सामाजिक न्याय का एक संवैधानिक उपाय है, न कि कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम। अगर आरक्षण को केवल आर्थिक आधार से जोड़ने की बात की जाती है, तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि EWS आरक्षण पर शांता कुमार जैसे नेता अक्सर खाम...

सीटू की स्थापना के पचास वर्ष पूर्ण होने पर सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रदेशभर में स्वर्ण जयंती कार्यक्रम आयोजित किये गए

सीटू की स्थापना के पचास वर्ष पूर्ण होने पर सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रदेशभर में स्वर्ण जयंती कार्यक्रम आयोजित किये गए। इन कार्यक्रमों में प्रदेश के ग्यारह जिलों में हज़ारों मजदूरों ने भाग लिया। इस दौरान मजदूरों ने सीटू के संविधान की शपथ ली।

                सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में सीटू के जिला व ब्लॉक कार्यालयों में सीटू द्वारा ध्वजारोहण किया गया व शहीदों को पुष्प अर्पित किए गए। इस दौरान विभिन्न जगहों पर सेमिनार,वक्तव्य व बैठकें आदि कार्यक्रम आयोजित किये गए। शिमला जिला में शिमला शहर,रामपुर व रोहड़ू,सिरमौर जिला में नाहन व पच्छाद,सोलन जिला में सोलन,परवाणु,बद्दी, बरोटीवाला,नालागढ़ व दाड़लाघाट,ऊना जिला में ऊना,अंब व गगरेट,हमीरपुर जिला में हमीरपुर,सुजानपुर,नादौन,बड़सर व भोरंज,कांगड़ा जिला में पालमपुर,नगरोटा व धर्मशाला,चंबा जिला में चंबा,भरमौर व चुवाड़ी,मंडी जिला में मंडी,धर्मपुर,निहरी व हणोगी,कुल्लू जिला में कुल्लू,औट,निरमण्ड व आनी,किन्नौर जिला के टापरी व सांगला आदि में सीटू के स्थापना दिवस पर अनेकों कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों को सीटू राष्ट्रीय सचिव डॉ कश्मीर ठाकुर,प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा,महासचिव प्रेम गौतम,बिहारी सेवगी,कुलदीप डोगरा,अजय दुलटा,बाबू राम,हिमी देवी,रविन्द्र कुमार,केवल कुमार,अशोक कटोच,सुदेश कुमारी,नरेंद्र विरुद्ध,प्रताप ठाकुर,जोगिंदर कुमार,रंजन कुमार,सुरेश राठौर,गुरनाम सिंह,मनोज कुमार,नीलम जसवाल,भूपेंद्र सिंह,राजेश शर्मा,गुरदास,राजकुमारी,सर चन्द,राजेश ठाकुर,पदम सिंह,कांता महंत,मदन नेगी,दिनेश नेगी व जीवन नेगी आदि ने सम्बोधित किया।

            उन्होंने कहा कि सीटू का पचास साल का लंबा सफर एकता,संघर्ष व बलिदानों का सफर रहा। इस दौरान सन 1975 की इमरजेंसी का मुकाबला,सन 1974 की रेलवे मजदूरों की ऐतिहासिक हड़ताल के साथ अडिग खड़े रहना,सन 1991 में लायी गयी उदारीकरण,निजीकरण व वैश्विकरण की नीतियों  के खिलाफ ऐतिहासिक संघर्ष,वर्ष 2014 के बाद चौबालिस श्रम कानूनों को खत्म करके केवल चार श्रम संहिताओं में बदलने के खिलाफ संघर्ष,नई आर्थिक नीतियों के खिलाफ अठारह देशव्यापी हड़तालें व कोरोना महामारी में चौदह श्रम कानूनों पर हमलों के खिलाफ सीटू के निरन्तर संघर्ष इस कड़ी में प्रमुख घटनाक्रम रहे। इस दौरान सीटू ने साम्प्रदायिकता तथा जातिवादी शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ निरन्तर संघर्ष किया। हिमाचल प्रदेश के छः सीटू नेताओं की शहादतों सहित देश भर में पूंजीपतियों की मजदूर विरोधी नीतियों का मुकाबला करते हुए सीटू के हज़ारों कार्यकर्ताओं ने शहादतें दीं। सीटू ने आर्थिक संघर्ष को वर्ग संघर्ष व सामाजिक संघर्ष से जोड़कर मजदूर आंदोलन को एक नई दिशा दी। 

  •                उन्होंने कहा कि वर्तमान केंद्र व प्रदेश सरकार लगातार मजदूर विरोधी नीतियां लागू कर रही है। कोरोना महामारी के दौर में भी सरकारें पूंजीपतियों के पक्ष में नीतियां बना रही हैं। इसके लिए श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी परिवर्तन किए जा रहे हैं। मोदी सरकार द्वारा चौबालिस श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में  बदलने के अपने पूँजीपतिपरस्त एजेंडे को संसद में पारित करवाने के बजाए कोरोना काल में एपिडेमिक एक्ट व डिज़ास्टर मैेनेजमेंट एक्ट की आड़ में अधिसूचनाओं,आदेशों व अधिसूचनाओं के ज़रिए ही श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी परिवर्तन किए जा रहे हैं। इसी मुहिम में गुजरात,मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश,हरियाणा,हिमाचल प्रदेश,महाराष्ट्र,पंजाब आदि में फैक्टरी एक्ट,इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट व कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट सहित चौदह श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी परिवर्तन कर दिए गए हैं। श्रम कानूनों को कई राज्यों में तीन वर्षों के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। कई राज्यों में काम के घण्टों को आठ से बढ़कर बढ़ करने की घोषणा कर दी गयी है। इस सबके खिलाफ मजदूर वर्ग के पास सड़कों पर उतरने के अलावा कोई चारा नहीं है। सीटू इस संघर्ष को निरन्तर जारी रखे हुए है।

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