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Showing posts from June, 2020

भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

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*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

*आखिर भारत में क्यों नहीं होता जातीय भेद और ब्राह्मणवादी (मनुवादी) वर्चस्व के खिलाफ अमेरिका जैसा प्रतिरोध?*

*आखिर भारत में क्यों नहीं होता जातीय भेद और ब्राह्मणवादी (मनुवादी) वर्चस्व के खिलाफ अमेरिका जैसा प्रतिरोध?* सुरेश कुमार   हमीरपुर ट्रेड यूनियन सीटू से सम्बंधित अक्सर हमारे यहां मिडिल क्लास के इंजिनियरिंग, मेडिकल, साइंस, मैनेजमेंट के डिग्रीधारी बात बात में भारत की तुलना अमेरिका से करते नहीं थकते, और पूरी कोशिश करते हैं कि वे या उनके बेटे- बेटियां यहां से डीग्री लेकर अमेरिका में नौकरी पा जायें और मौका मिले तो वहीं बस जाये, सक्षम लोग मौका मिलते ही यही करते हैं , जिनके बेटे बेटी ऐसा करने मे सफल हो जाते हैं उनके मां बाप यहां अपने को सुपर नागरिक का स्वयं दर्जा देकर औरों से सुपर बनने का व्यवहार करने लगते हैं और हमारा मूर्ख समाज उन्हें यह मान्यता दे भी देता है। निजी तौर पर अमेरिका और उसका कथित जनतंत्र अपन जैसे लोगों की कभी पसंद नहीं रहे। भले ही तकनीकी विकास वहां पर दुनियां में सर्वश्रेष्ठ है। कुल के वावजूद जब हम भारत से तुलना करते हैं तो अमेरिकी समाज वाकई तरक्की-पसंद नजर आता है।इसलिये नहीं कि वहां तकनिकी विकास ज्यादा है बल्कि वहां पर मानव मूल्यों की कीमत भी दुनियां में सबसे ज्य...