जाति का दर्द नही झेला. इसलिए आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*:--आशीष कुमार

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 *जाति का दर्द नही झेला. इसलिए  आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*  *गरीबी नहीं, सामाजिक भेदभाव है असली कारण*           ( आशीष कुमार. राज्य संयोजक शोषण मुक्ति मंच ) शांता कुमार  द्वारा कुछ दिन पूर्व दिये ब्यान में  यह कहना कि देश में आरक्षण का आधार जाति नहीं बल्कि केवल गरीबी होना चाहिए, न तो कोई नया तर्क है और न ही यह भारतीय समाज की वास्तविकता को समझने वाला दृष्टिकोण है। सच यह है कि भारत में आरक्षण की व्यवस्था गरीबी दूर करने के लिए नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे जातिगत भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और अवसरों की असमानता को दूर करने के लिए बनाई गई थी। भारत का संविधान, जिसे B. R. Ambedkar जैसे महान समाज सुधारकों ने गढ़ा, इस सच्चाई को स्वीकार करता है कि कुछ जातियों को केवल आर्थिक रूप से नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी दबाया गया। इसलिए आरक्षण सामाजिक न्याय का एक संवैधानिक उपाय है, न कि कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम। अगर आरक्षण को केवल आर्थिक आधार से जोड़ने की बात की जाती है, तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि EWS आरक्षण पर शांता कुमार जैसे नेता अक्सर खाम...

*किसान आंदोलन को तोड़ने की साजिश संविधान दिवस पर संविधान की हत्या -डॉ. कुलदीप सिंह तँवर*



●  किसान आंदोलन को तोड़ने की साजिश संविधान दिवस पर संविधान की हत्या -डॉ. कुलदीप सिंह तँवर

●  हरियाणा सरकार की कायरता और केंद्र सरकार की तानाशाही किसानों के आंदोलन को नहीं रोक पाएगी


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हिमाचल किसान सभा के राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तँवर ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए दिल्ली जा रहे किसानों का रास्ता रोकने, उन पर पानी के फव्वारे छोड़ने और आंसूगैस के गोले दागने की कड़ी निंदा की है।


डॉ. तँवर ने कहा कि भाजपा की हरियाणा सरकार ने जहाँ किसानों को रोकने के लिए सड़कों के बीच खाई खोदने, सड़कों पर चट्टाननुमा पत्थर डालने और मिट्टी के पहाड़ खड़े करने की कायरतापूर्ण हरकत की है और अपने ही किसानों के साथ विश्वासघात किया है वहीं केन्द्र सरकार ने किसानों के आंदोलन को कुचलने के लिए दिल्ली के खेल मैदानों को जेल में बदलने की घिनौनी साजिश रची है।


 निहत्थे किसानों के सामने हथियारबंद पुलिस और फौज को खड़ा करके मोदी सरकार जनता को जनता से लड़ाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि जनता आपस में उलझी रहे और वे देश के सार्वजनिक क्षेत्र को निजी हाथों में बिना किसी रुकावट के बेच सके।


उन्होंने आन्दोलन के दौरान किसान गुरमीत लहरा की मौत पर भी शोक प्रकट किया।

किसान सभा अध्यक्ष में कहा कि संविधान दिवस पर संविधान की हत्या का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि जहां नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और अपनी बात शासन तक पहुंचाने से भी रोका जा रहा है।


डॉ. तंवर ने कहा कि कोरोना के कारण अभी देश भर से किसान इस आन्दोलन में भाव नहीं ले पाए हैं लेकिन हर राज्य में जगह-जगह लाखों किसान आन्दोलन के पक्ष में प्रदर्शन कर रहे हैं।


किसान नेता ने कहा कि किसान-मज़दूर विरोधी फैसले और कानून को वापिस करवाये बिना यह आन्दोलन खत्म नहीं होगा।




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