Posts

Showing posts from December, 2022

भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

Image
*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

अवसर की समानता और बाबा साहब का सपना*

Image
आशीष कुमार  राज्य सह संयोजक दलित शोषण मुक्ति मंच हिमाचल प्रदेश एवम केंद्रीय कमेटी सदस्य दलित शोषण मुक्ति मंच आज  बाबा साहब का 67 वां महापरनिर्वाण दिन   है। आज के दिन खास कर इस बार हर दल अम्बेडकर जी के सपनो का भारत बनाने की बात करंगे और बेशुमार वायदे भी करेंगे, और उनके विचारों  पर चलने की अपील भी करेंगे ,ऐसा लाजमी भी है, परन्तु आज  देश में   लोकतंत्र की हत्या का दौर चला है  ,और मौजूदा व्यवस्था में  संविधान  बचाने के लिए हम मौजूदा सरकार से सवाल भी खड़े करने की हिम्मत नही कर पा रहे है। आज के दिन  वो लोग भी अम्बेडकर महापरिनिर्वाण की  जयंती पर माला अर्पण करते है जिनको इस देश के संविधान से कोई खास लगाव नही है ,  अपितु वह लोग हर जगह संविधान की धज्जियां उड़ाते रहते है।  जाने अनजाने हम किसी न किसी रूप में  उन लोंगो को ही  बढ़ावा दे रहे है जो कि अम्बेडकर जी के विचारों से कोई वास्ता नही रखते है या ऐसा कह सकते है  बाबा साहब की विचारधारा के बिल्कुल विपरीत है, आज  विचारों की क्या विषमताएं है  कुछ  मह...