Posts

Showing posts from May, 2020

भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

Image
*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

सीटू की स्थापना के पचास वर्ष पूर्ण होने पर सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रदेशभर में स्वर्ण जयंती कार्यक्रम आयोजित किये गए

Image
सीटू की स्थापना के पचास वर्ष पूर्ण होने पर सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रदेशभर में स्वर्ण जयंती कार्यक्रम आयोजित किये गए। इन कार्यक्रमों में प्रदेश के ग्यारह जिलों में हज़ारों मजदूरों ने भाग लिया। इस दौरान मजदूरों ने सीटू के संविधान की शपथ ली।                 सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में सीटू के जिला व ब्लॉक कार्यालयों में सीटू द्वारा ध्वजारोहण किया गया व शहीदों को पुष्प अर्पित किए गए। इस दौरान विभिन्न जगहों पर सेमिनार,वक्तव्य व बैठकें आदि कार्यक्रम आयोजित किये गए। शिमला जिला में शिमला शहर,रामपुर व रोहड़ू,सिरमौर जिला में नाहन व पच्छाद,सोलन जिला में सोलन,परवाणु,बद्दी, बरोटीवाला,नालागढ़ व दाड़लाघाट,ऊना जिला में ऊना,अंब व गगरेट,हमीरपुर जिला में हमीरपुर,सुजानपुर,नादौन,बड़सर व भोरंज,कांगड़ा जिला में पालमपुर,नगरोटा व धर्मशाला,चंबा जिला में चंबा,भरमौर व चुवाड़ी,मंडी जिला में मंडी,धर्मपुर,निहरी व हणोगी,कुल्लू जिला में कुल्लू,औट,निरमण्ड व आनी,किन्नौर जिला के टापरी व सांगला आदि में सीटू के स्...

*SC/ST वर्ग के लोगों के जीवन में आर्थिक सम्पन्नता आने पर भी उनके समाजिक पिछड़े पन का कभी अंत नहीं होता*। आशीष कुमार

Image
*आजादी के 70 सालों बाद SC/ST वर्ग को आरक्षण की जरूरत क्यों* *SC/ST वर्ग के लोगों के जीवन में आर्थिक सम्पन्नता आने पर भी उनके समाजिक पिछड़े पन का कभी  अंत नहीं होता*।                          *आशीष कुमार आशी* हाल ही में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने   निर्णय दिया है  जिसमें  उच्चतम न्यायालय ने ये निर्णय  दिया कि जिन अनुसूचित जाति जनजाति के व्यक्तियों को  आरक्षण का एक बार लाभ मिल गया है उनको दुबारा इसका लाभ नहीं मिलेगा।  इसके बाद लगातार हर जगह सोशल मीडिया पर आरक्षण विरोधी प्रचार प्रसार शुरू हो गया है कुछ पार्टियों के नेता सोशल मीडिया पर भाजपा कांग्रेस के टिकट पर  विधान सभा और सांसद में पहुंचे अपनी पार्टियों के दलित प्रतिनिधियों से सवाल पूछ रहे है बल्कि उनको एक आदेश जारी कर रहे हैं कि वे SC,St आरक्षण का विरोध करे परन्तु सभी खामोशी से उस तरह के पोस्ट को नजर अंदाज कर रहे है क्यूंकि वे जानते है कि जिन राजनीतिक दलों का वे लोग विधानसभा। लोकसभा में प्रतिनिधित्व करते है यदि वे अपनी पार्टी...

भाजपा शासित राज्यों में नियोक्ताओं को सभी श्रम कानूनों से छूट देने की योजना :-----सीटू

Image
भाजपा शासित राज्यों में नियोक्ताओं को सभी श्रम कानूनों से छूट देने की योजना तथा कुछ अन्य राज्यों में श्रम कानूनों के तहत बाध्यताओं के गंभीर उल्लंघन की सीटू द्वारा निंदा  कामकाजी जनता के बहुतायत को 45 दिनों के तालाबंदी की प्रक्रिया में नौकरियों की बंदी, वेतन की हानि, निवास से बेदखली आदि अमानवीय कष्टों में झोंक दिया गया है। इन लोगों को मुनाफे के भूखे नियोक्ता वर्ग द्वारा भूखी अस्तित्व विहीन वस्तुओं में घटाकर रख दिया गया है। इसपर वर्तमान सरकार ने, इन कामकाजी लोगों को वास्तव में गुलामी के स्तर पर लाने के लिए, इन पर अपने फनों और पंजों के साथ हमला कर दिया हैं।  केंद्रीय सरकार ने इस क्रूर कवायद को शुरू करने के लिए अपनी आज्ञाकारी राज्य सरकारों को खुला छोड़ देने की रणनीति बनाई है। भाजपा नेतृत्व की गुजरात सरकार ने अगुआई करते हुए एकतरफा रूप से, बगैर फैक्टरी एक्ट के अनुसार वैध मुआवजे के, दैनिक कामकाज का समय 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया। हरियाणा और मध्य प्रदेश की सरकारों ने भी इसी ओर कदम बढ़ाए। इसके बाद पंजाब और राजस्थान में राज्य सरकारों की ओर से भी इसी तरह दैनिक कामकाज का समय 12...

*क्या भारत में मजदूरों को मिलने वाली मजदूरी और सरकार द्वारा निर्धारित मजदूरी उन्हें और उनके परिवार को दो वक्त की रोटी और अच्छी शिक्षा देने के लिए पर्याप्त है*==आशीष कुमार आशी

Image
*क्या  COVID19  के समय में मजदूरों के बदतर हालतों को देख कर  भारत में मजदूरों को उनके मजदूर होने पर बधाई दे सकते है ?* *क्या भारत में मजदूरों को मिलने वाली मजदूरी और सरकार द्वारा निर्धारित मजदूरी उन्हें और उनके परिवार को दो वक्त की रोटी  और अच्छी शिक्षा देने के लिए पर्याप्त है*        *आशीष कुमार आशी* आज  मजदूर दिवस पर पूरी दुनिया में मजदूरों के योगदान को और किसी भी राष्ट्र निर्माण में मजदूरों के योगदान को याद किया जाता है।  परन्तु यदि हम भारत के संदर्भ में देखे तो सर्वप्रथम भारत में 1 मई 1923 को पहली बार मजदूर दिवस मनाया गया था।  1923 से लेकर 2020 तक  लगभग 97 वर्षों के दौरान क्या हम मजदूरों की स्थिति और इस कोराना जैसी महामारी के दौरान  जो हालत मजदूरों की हुई है और अब भी है क्या हम उनको मजदूर दिवस पर मजदूर होने की बधाई दे सकते है या नहीं? ये आज महामारी के दौरान की बात नहीं है परन्तु भारत जैसे देश में क्या मजदूरों को सम्मानजनक  मजदूरी मिलती है या नहीं?  ये अपने आप में एक गंभीर प्रश्न है और प्रश्न देश क...

*अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस - मजदूर वर्ग के समक्ष चुनौती व अवसर* *विजेंद्र मेहरा*

Image
*अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस - मजदूर वर्ग के समक्ष चुनौती व अवसर*                        *विजेंद्र मेहरा* शिकागो के अमर शहीदों ने मालिकों की गुलामी से मुक्ति,अपने आदर्शों को पूर्ण करने व पूंजीपतियों की लूट को रोकने के लिए 11 नवम्बर 1887 को खुशी-खुशी फांसी का फंदा चूम लिया। ठीक वैसे ही जैसे बाद में 23 मार्च 1931 को भारतवर्ष में शहीद भगत सिंह,सुखदेव व राजगुरु ने इंसान के हाथों इंसान के शोषण को बन्द करने के लिए फांसी के फंदे को चूमा। फांसी के फंदे की ओर जाते हुए शिकागो के ऐतिहासिक मजदूर आंदोलन के प्रमुख नेता ऑगस्टस स्पाइस ने शासक वर्ग को ललकारा: *एक दिन आएगा जब हमारी खामोशी उन आवाजों से भी ज़्यादा ताकतवर होगी जिन्हें आज तुम दबा रहे हो।* ऑगस्टस स्पाइस के शब्दों का महत्व आज बिल्कुल साफ नजर आता है जब मजदूर वर्ग के नेतृत्व में अनेकों क्रांतियों का गवाह बनी दुनिया के फ्रांस जैसे मुल्क में येलो वेस्ट व अमरीका जैसे देश में रैड शर्ट मूवमेंट में लाखों लोग सड़कों पर उतरकर हुक्मरानों  की लूट को चुनौती देते हैं। इन शब्दों का महत्व...