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Showing posts from December, 2020

भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

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*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

नागरिक हॉस्पिटल ददाहू में स्टाफ नर्स से चिकित्सक द्वारा अभद्र व्यवहार पर दलित शोषण मुक्ति मंच उग्र

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 दलित शोषण मुक्ति मंच जिला सिरमौर नागरिक अस्पताल ददाहु में एक डॉक्टर द्वारा स्टाफ नर्स के साथ अभद्र व्यवहार करने की कड़ी निंदा करता है। नागरिक अस्पताल दादाहु में काम कर रही  ही गणों देवी  और ने आज दलित शोषण मुक्ति मंच और जनवादी महिला समिति  को लिखित रूप से अपने साथ हो रहे  दुर्व्यवहार की गुहार लगाई और सहायता  की मांग की है और उस मदद में उन्होंने कहा है कि पिछले काफी समय से अमित गोयल नाम का डॉक्टर उनके साथ दुर्व्यवहार   कर रहा है।  है और उनके साथ गाली गलौज और अभद्र तरीके से बात करता है इसकी दलित शोषण मुक्ति मंच निंदा करती है गणो देवी ने बताया है कि उन्होंने पहले भी इसकी शिकायत सीएमओ नाहन जिला सिरमौर  को लिखित सूचना दी थी लेकिन उस पर आज तक कोई कार्रवाई अमल में  नहीं लाई गई गणो देवी ने यह मांग पत्र दलित शोषण मुक्ति मंच जिला सिरमोर को और जनवादी महिला समिति को संयुक्त रूप से दिया है और उन्हें मदद की गुहार लगाई है।इसी कड़ी में दलित शोषण मुक्ति मंच जिला सिरमौर आज जिला संयोजक आशीष कुमार की अगुवाई में और जनवादी महिला समिति की जिला कोशाध्यक्ष...

अवसर की समानता और बाबा साहब का सपना:---- आशीष कुमार आशी

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 आज  बाबा साहब का 66 वां महापरनिर्वाण दिन   है। आज के दिन खास कर इस बार हर दल अम्बेडकर जी के सपनो का भारत बनाने की कोशिश करंगे और बेशुमार वायदे भी करेंगे, और उनके विचारों  पर चलने की अपील भी करेंगे ,ऐसा लाजमी भी है, परन्तु आज लोकतंत्र की हत्या का दौर चला है   संविधान  बचाने की इस दौर में हम  मौजूदा सरकार ने सवाल भी खड़े करने की हिम्मत नही कर पा रहे है। आज के दिन हम वो लोग भी अम्बेडकर महापरिनिर्वाण और जयंती पर माला अर्पण करते है जिनको इन देश के संविधान से कोई खास लगाव नही  अपितु वह लोग हर जगह संविधान की धज्जियां उड़ाते रहते है।  जाने अनजाने हम किसी न किसी रूप में  उन लोंगो को ही  बढ़ावा दे रहे है जो कि अम्बेडकर जी के विचारों से कोई वास्ता नही रखते है या ऐसा कह सकते है  बाबा साहब की विचारधारा से विपरीत थे, मुझे यँहा विचारों की क्या विषमताएं है  कुछ पंक्तियन का जिक्र यँहा करने जा रहा हूँ में यँहा कहते हुए बिल्कुल भी असहज महसूस नही कर रहा हूँ कि मार्क्सवाद में  और वर्ग संघर्ष से देश मे अवसर की समानता पैदा की जा सकत...