भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

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*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

33 करोड़ देवी देवताओं और उनके सेनापति पर भी भारी।पड़ा Covid--19

कोरॉना जैसी स्थिति सवाल खड़ा करती है दैविक शक्तियों पर।
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 ये महज किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है बल्कि हम सर्व धर्मो की।आस्था का सम्मान करते हुए उन धर्म के ठेकेदारों से सवाल पूछने का साहस कर रहे है जिन्होंने धर्म को धंधा बना कर आज तक गलत प्रचारों से। अपने हजारों। अनुयायियों की भावनाओ का मजाक बना कर रखा, कोविड 19 जैसे वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए हर कोई अपने अपने नुस्खे बता रहे है , परन्तु आज पूरी ।दुनिया में ये एक वैश्विक संक्रमण है जिसने मंदिर , मस्जिदों , और चर्चो आदि पर ताले जडवा दिए ।
 देश और विदेशों में बड़े बड़े मंदिरों मठाधीशों, मौलवियों के हाथ खड़े हो गए है , जो लोग झाड़ू फूक करके अंधविश्वासिों  के चित्सक बने फिरते थे आज उन्हीं मंदिर मस्जिदों में ताले जड़े जा रहे है, न अब कालों के काल महादेव नजर आ।रहे है और नहीं कोई देव गुर जो बात बात पर चावल और सरसों के दाने से इलाज करने वालों का कही अता पता है , विश्वगुरु बताने वाले देश जिनके पास देवी देवताओं की फौज भी भारतीय सेना से अधिक और भारतीय डॉक्टरों से ज़्यादा है आज वही 33 करोड़ देवी  देवताओं के स्थानों में ताले जड़े।गए है , और। उन देवी देवताओं के तथाकथित सेनापति भी मुंह पर मास्क।लगा कर पूजा अर्चना कर रहे है, गौमूत्र को तवजों देने वालों के बीच सेनिटाइजर के उत्पादों को बनाने की और खरीदने की होड़ लग गई है, जब ये कहा जाता है कि देवता हर जगह निवास करते है तो फिर क्यों नहीं इस संक्रमण को रोक सकते ।गंगा की पूजा करने वाले देश में तो सेनिटाइजर की आवश्यकता ही क्यों पड़ह रही है किसी को हरिद्वार से गंगा जल की  सप्लाई करने की जरूरत थी, परन्तु साथियों  आस्था का खिलवाड़ सिर्फ शोषण वाली व्यवस्था को।जिन्दा रखने के लिए ही उपयोग कर सकते हो परन्तु जब अपनी जान पर बनती है तब अस्पताल ही याद आते हैं। शिक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य जैसी मूल भूत बातों पर बात करना क्यूं जरूरी है इसका उदहारण कोविड़ 19 के संक्रमण से सामने आ गया। मुझे नहीं लगता कि।अब कोई आपको गद्दर या देश द्रोही कहेगा ,क्यूंकि देश द्रोही आज वो है जिन्होंने ने सिर्फ अपने अंधविश्वास और अहंकार को।जिन्दा रखने के लिए स्वास्थ्य शिक्षा जैसे बुनियादी सेवाओं के बारे में बात करने वालों को या तो देश द्रोही कहा था या फिर पाकिस्तान भेजने की बात कही थी।
साथियों अंत में आप सभी से अपील है कि वैज्ञानिक रूप से जैसे भी इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है हम सभी को।अपने देश की सरकारों के साथ उनके।वैज्ञानिक दृष्टकोण वाले रुख पर उनका सहयोग करना चाहिए। आप सभी किसी भी अंधविशवासों।में।ना पड़े , साफ सफाई रखें और खास कर उन लोगों का ध्यान रखे जिनके घर का चूल्हा बिना काम करने से नहीं जल।सकता।

आशीष कुमार आशी

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