दीयों की रोशनी में दिखाई देते अंधेरे — आशीष कुमार ‘आशी’

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 दीयों की रोशनी में दिखाई देते अंधेरे — आशीष कुमार ‘आशी’ सेवा संकल्प और विकास के प्रतीक के रूप में 17 सितम्बर  प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर देशभर में दीये जलाए गए। हर जगह  रोशनी हुई, उत्सव हुआ, तस्वीरें खिंचीं और इसे सेवा, संकल्प और विकास का प्रतीक बताया गया। लेकिन कभी-कभी बहुत ज्यादा रोशनी भी उन सवालों को और साफ कर देती है, जिन्हें हम अंधेरे में छिपा देना चाहते हैं। सत्ता के उत्सव और जनता की जिंदगी के बीच का यह फासला जितना चमकदार बनाया जाता है, उतना ही तीखा दिखाई देता है।  2014 से और आज तक बहुत कुछ बदला है , या फिर ऐसा दर्शाने की कोशिश हुई है की देश की शुरुवात सही मायने में 2014 में हुई  और धीरे धीरे शायद यदि जनता की  आँखे ऐसे ही इन  दियों से चोंधियाती रही तो शायद ये भी सम्भव है की 17 सितम्बर 1950 में गुजरात के  वडनगर में मोदी जी का जन्म हुआ शायद उसे चार धामों की तरह पाँचवे धाम में ना बताना शुरु कर दे,  परन्तु  आज उन्हीं दीयों की लौ को देखते हुए एक मजदूर पूछ रहा है—मेरी मेहनत की न्यूनतम कीमत आखिर कब तय होगी? काम के सही दाम , समान काम का ...

नाहन में पीड़ित बच्ची के परिजनों को न्याय दिलाने को हर संभव मदद करेंगे==दलित शोषण मुक्ति मंच

दलित शोषण मुक्ति मंच जिला सिरमौर मंच के संयोजक आशीष कुमार ने जारी एक प्रेस बयान में अभी हाल ही में नाहन में एक 7 साल की बच्ची से हुए दुष्कर्म की।कड़ी निन्दा की है।
आशीष कुमार ने कहा कि।देवभूमि कहे जाने वाले प्रदेश और शांत जिला सिरमौर में भी इस तरह की।घटनाएं बढ़ रही है। अभी  2 दिन पहले ही निर्भया के।दोषियों को फांसी हुई परन्तु उन सबसे सबक ना लेते हुए भी दिन प्रतिदिन महिलाओं और छोटी बच्चियों के साथ इस तरह की घटनाएं घट रही है। प्रदेश के अंदर इस तरह की।घटनाएं प्रदेश और जिला।की।कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।  एमबीएम न्यूज की।ख़बर के।अनुसार। लड़की।अनुसूचित जाति से सम्बन्ध रखती है। परन्तु घटना चाहे किसी भी समाज की लड़की।के।साथ हों वो बर्दाश्त करने लायक नहीं है । परन्तु अधिकतर मामलों में ये देखा गया की।इस तरह की घटनाएं ज़्यादातर समाज में हाशिए पर पड़े लोगो  के।साथ और उनके परिजनों को।साथ होती।रहती है।
ये घटना मात्र एक नाहन क्षेत्र की ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश और जिला के।लिए एक काले ध्ब्बे की तरह है , इस घटना ने पूरे प्रदेश को शर्मसार कर दिया है।  साथ ही दलित शोषण मुक्ति मंच पोलिस प्रशासन ये भी जानना चाहता है कि आरोपियों को पुलिस रिमांड पर न।भेज कर न्यायिक हिरासत में भेजने के पीछे उनकी क्या मंशा है , क्यूंकि।बिना पुलिस रिमांड के प्रशासन को कैसे पता चलेगा की ये एक दिन की।घटना है या काफी समय से आरोपी। बच्ची को प्रताड़ित कर रहे है।
दलित शोषण मुक्ति मंच। मांग करता है कि समय रहते पुलिस इस मामले को।गम्भीरता देखे वरना दलित शोषण मुक्ति मंच बच्ची को न्याय दिलाने और आरोपियों को।फांसी के फंदे पर लटकाने के लिए किसी भी हद तक जाने से पीछे नहीं हटेंगे।

 आशीष कुमार
जिला संयोजक दलित शोषण मुक्ति मंच

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