भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

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*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

प्रदेश के हर एक शैक्षणिक संस्थान में सैनिटाइजर टनल का निर्माण किया जाए :----SFI

STUDENTS' FEDERATION OF INDIA(SFI)
       H.P STATE COMMITTEE
                PRESS NOTE
                                          Date:-19-04-2020

 एस एफ आई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी, आज प्रैस विज्ञप्ति के माध्यम से भीषण महामारी के इस दौर में प्रदेश में छात्रों को पेश  अा रही दिक्कतों को प्रदेश  सरकार से अवगत कराना चाहती है।जैसा कि विदित है ,पूरा विश्व करोना महामारी की चपेट में है।हमारा प्रदेश भी इसकी जकड़न से मुक्त नहीं है ,लगातार मामले सामने अा रहे हैं।पूरा देश लॉक डाउन के अन्तर्गत इस महामारी से निपटने के लिए तत्पर है। इसी स्थिति में प्रदेश में छात्रों को विभिन्न समस्याओं से रूबरू होना पड़ रहा है।एस एफ आई एक प्रगतिशील और जिम्मेवार छात्र संगठन होने के नाते इस लड़ाई में सरकार के साथ विभिन्न गतिविधियों में अपना योगदान सुनिश्चित कर रही है।लेकिन छात्रों को पेश  रही दिक्कतों को चिन्हित कर सरकार के समक्ष रखना एस एफ आई का प्राथमिक दायित्व है ,इसलिए निम्न मांगो पर एस एफ आई सरकार से छात्र हित में त्वरित एवम् छात्र हितेषी निर्णय चाहती है,मांगे इस प्रकार है।

1.  प्रदेश के हर एक शैक्षणिक संस्थान में सैनिटाइजर टनल का निर्माण किया जाए ताकि छात्र,अध्यापक और कर्मचारी तथा बाहर से आने वाले आगंतुक सुरक्षित महसूस कर सके।

2.  प्रदेश के छात्र विभिन्न कठिन परिस्थतियों में अपनी शिक्षा ग्रहण करते हैं,अधिकांश छात्र पर्याप्त छात्रावास के आभाव में किराए के मकान में रहते हैं।लेकिन इस भीषण महामारी के आने से  छात्रों के परिवावालों की आर्थिकी बुरी तरह से डगमगा गई है। इसलिए महाराष्ट्र सरकार के निर्णय की भांति तमाम छात्रों का एक महीने का किराया पूर्ण रूप से माफ किया जाए।प्रदेश सरकार आवास विभाग को निर्देश जारी कर इस छात्र हितेषी निर्णय को जल्द लागू करे।

3. प्रदेश में छात्रों को लंबित पड़ी छात्रवृत्ति का जल्द भुगतान किया जाए,और इसके अतिरिक्त स्नातक,स्नातकोत्तर तथा शोधार्थी छात्रों को विशेष भत्ता देने की घोषणा की जाए ताकि छात्र अपनी जरूरी शैक्षणिक वस्तुओं को खरीदने के लिए समर्थ हो सके।

4.  करोना महामारी के चलते आधी आबादी की सबसे महत्त्वपूर्ण आवश्कता की पूर्ति नहीं हो रही है। सैनिटरी नैपकिन के आभाव में महिलाएं असुरक्षित कपड़े का इस्तेमाल कर अपने स्वास्थ्य को जोखिम में डाल रही है ,तथा विभिन्न बीमारियों का फैलने का खतरा भी इससे बड़ रहा है। एस एफ आई हिमाचल प्रदेश सरकार से मांग करती है कि सैनिटरी नैपकिन को जरूरी मदो की सूची में जोड़ा जाए और इसकी बिक्री सुनिश्चित की जाए।

5. प्रदेश में छात्रों के पठन पाठन के लिए ऑनलाइन सुविधा को सशक्त किया जाए तथा आगामी सत्र के लिए ठोस योजना बनाकर छात्रों को सुविधा दी जाए।

एस एफ आई हिमाचल प्रदेश सरकार से ये  उम्मीद करती है कि उक्त मांगो पर विस्तृत चर्चा परिचर्चा करके छात्र हितेषी निर्णय लेगी।एस एफ आई राज्य सचिव अमित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार को वैश्विक महामारी के इस दौर में छात्रों को अंतरिम राहत के तौर पर ये मांगे मान कर अपने छात्र हितेषी होने का प्रमाण देने की जरूरत है। SFI ने  सरकार को आश्वस्त किया है कि छात्र हर मोर्चे में बतौर समाजसेवी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तत्पर है। एस एफ आई पहले से ही अपने हजारों कार्यकर्ताओं को पूरे प्रदेश के अंदर इस महामारी के खिलाफ युद्ध में झोंक चुकी है।इसलिए सरकार ये सुनिश्चित करे कि छात्रों की ये मांगे जल्द से जल्द पूरी हो।
राज्य अध्यक्ष                राज्य सचिव
रमन थारटा।               अमित ठाकुर

                   9857842157

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