भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

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*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

आरक्षण विरोधी नीति के विरोध में सड़कों पर उतरेंगे सभी दलित संगठन=दलित शोषण मुक्ति मंच



दलित शोषण मुक्ति मंच ने दलितों की मांगों को लेकर16 सितमन्बर 2020 को हिमाचल विधान सभा पर प्रदर्शन करेगी। प्रदेश सरकार दलितों के संविधानिक अधिकारों कोएक एक करके छिन रही है।सरकारी ,अर्धसरकारी स्थाई नोकरियों का स्वरूप बदला जा रहा है। सरकार द्वारा पार्ट टाइम  अनुबन्द टेके आउटसोर्स स्कीम वर्कर्स,पी टी ऐ एस एम सी व पंचायत स्तर पर अलग-2 रूप में भर्तियां की जा रही है। इन भर्तियो में आरक्षण लागू नहीं किया जाता। प्रदेश में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाती के लोगों की लगातार हत्या,हमले व छुआछूट ,समाजिक भेद भाव की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून को सख्ती से लागू नही किया जा रहा है। SC/ST वर्ग के लोगों को सरकारी नोकरियों में 85बें सविधान संसोधन के मुताविक पदोन्ति में आरक्षण लागू नही किया जाता।SC/ST component  paln      के मुताविक अनुचुचित जाती की संख्या के आधार पर बजट नही दिया जाता। इस तरह सरकार बड़े पैमाने पर दलितों का शोषण कर रही है।दलित शोषण मुक्ति मंच मुख्य मंत्री महोदय को दलितों की मांगों को लेकर मांगपत्र देगा।जिसमें मांग की जायेगी कीSC/STके लिए सभी प्रकार की नोकरियों में आरक्षण लागू किया जाए ।दलितों की हत्यायों ,समाजिक भेद भाव छुआछूत जैसी घटनाओं को रोकने के लिए अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण के

कानून 1989 को सख्ती से लागू किया जाए।करसोग में विमला देवी की हत्या के बाद उसके परिवार को मुआबजा दिया जाए।नेरवा में सत्या    देवी की पेंशन बहाल की जाए। कुमारसैन में मीनाक्षी देवी के बिलों का भुगतान किया जाए।अनुसूचित जाति आयोग का गठन किया जाए।


              

             

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