भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

Image
*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

*एक सभ्य समाज का सपना* :__ अंशुला ठाकुर

 *एक सभ्य समाज का सपना*




 *समाज का अधूरेपन को लेकर एक कहानी स्वरचित*: अंशुला ठाकुर 💕


अंधेरा घिर गया था मगर गाड़ी खराब हो गई और अब एक दूजे का हाथ थामे चलना शुरू किया, इस उम्मीद में कि आगे कहीं कोई मदद मिल जाए । "इतनी रात घर से मत निकला करो ", माँ के उपदेशात्मक स्वर मेरे जहन में गूंज रहे थे, माँ हमेशा सही कहती है ,बस हम ही नहीं सुनते उनकी बात कभी । अब डर और ठंड से बुरा हाल हो रहा था तो माँ ही याद आ रहीं थीं मुझे। 

मेरे मंगेतर साथ थे और परेशान भी मगर फिर भी  बिना कुछ कहे चले जा रहे थे , सामने थोड़ी रोशनी दिखाई दी तो हमें थोड़ा हौसला हुआ। 

थोड़ा और तेज़ी से आगे बढ़े तो देखा वहां एक चाय का स्टाॅल था ,

बाकी सब बंद हो गया था, उस चाय वाले से पास किसी ठिकाने का पूछा तो वो बोला, "आगे और घना जंगल है साहब, मैडम भी साथ है ,आप बुरा ना मानो तो मेरे घर चल दो । छोटा है मगर सुरक्षित है , सुबह होते ही आपको कोई और मदद भी मिल ही जाऐगी,रोशनी की बात अलग होती है साहब। "

मेरा डर दूर हो गया था और मैं बस यही सोच रही थी कि इंसानियत अभी भी बाकी है, काश हर इंसान में इतनी इंसानियत होती तो समाज कितना अच्छा होता ....................है ना। ।



Comments

Popular posts from this blog

मंडी में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत पर 8 जनवरी सीटू से संबंधित आंगनवाड़ी यूनियन करेंगी प्रदर्शन

तीन माह से केंद्र से नहीं मिल रहा मानदेय, और पोषण ट्रैकर और टी एच आर के लिए हर माह ओ टी पी के नाम पर लाभार्थी भी करते है प्रताड़ित*

तीन माह से लंबित केंद्र का मानदेय तत्काल जारी किया जाए।