भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

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*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

17 मार्च को सिरमौर से सैंकड़ों मिड डे मील वर्कर विधानसभा मार्च में लेंगे भाग:-- नरेश शर्मा

 आज सरान्ह में मिड डे मील वर्कर यूनियन समन्धित सीटू  की बैठक  अध्यक्ष खेमराज  की अध्यक्षता में हुई , बैठक में मुख्य रूप  से सीटू जिला कोशाध्यक्ष आशीश कुमार ने भाग लिया बैठक में मिड डे मील वर्करज की मांगों को लेकर विशेष रूप से चर्चा की गई बैठक को संबोधित करते हुए संजय गौतम और नरेश शर्मा ने बताया कि मिड डे मील वर्करज को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए संजय गौतम ने कहा कि सरकार ने अभी तक उच्च न्यायालय जिसमे मिड डे  मील वर्कर को 12 माह का वेतन देने के आदेश सरकार को दिए थे परन्तु सरकार ने उसका भी अभी तक पालन नही किया है । नरेश शर्मा ने कहा कि आने वाली 17 मार्च को जिला सिरमौर से 100 के करीब मिड डे मील वर्कर विधानसभा का घेराव।में शामिल होंगे जिसमे मल्टी टास्क वर्कर के रूप में मिड डे मील वर्कर को ही नियुक्त किया जाए। मिड डे मील वर्कर की बैठक में   40 लोगों ने भाग लिया जिसमे अरुणा, जय प्रकाश , फतह सिंह, शयाम दत्त, कल्पना, चमन लाल , मदन लाल,आदि लोगों ने भाग लिया।




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