भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

Image
*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

ICDS की स्थापना के बाद से अपने पांच साल के कार्यकाल में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के पारिश्रमिक में एक बार भी वृद्धि नहीं की है मोदी सरकार ने*




आज आंगनवाड़ी वर्कर्ज हेल्परज यूनियन सीटू की प्रोजेक्ट कमेटी संगड़ाह   की  बैठक किरण बाला की अध्यक्षता मे हुई , बैठक मे सीटू जिला महासचिव आशीष कुमार  विशेष रूप से उपस्थित रहे  ,बैठक मे बजट 2024-25 और मोदी राज के पिछले पांच वर्षों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं और योजना कार्यकर्ताओं की पूर्ण उपेक्षा और अपमान का कड़ा विरोध किया है 

   प्रोजेक्ट  संगड़ाह   की अध्यक्षा किरण बाला   महासचिव सीमा, धन्वंती , कमला, सीमा, ममता  ने कहा की  प्रोजेक्ट संगड़ाह  

*16 फरवरी 2024 को अखिल भारतीय हड़ताल में बढ़ चढ़ कर भाग लेगा* 

प्रोजेक्ट कमेटी सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से 16 फरवरी 2024 को  आंगनवाड़ी केन्द्रो को बंद करने और  हड़ताल मे शामिल होने का आह्वान किया है। सीटू जिला महसचिव आशीष कुमार ने कहा की 

भाजपा के नेतृत्व में मोदी-2 सरकार ऐसी *एकमात्र सरकार है जिसने ICDS की स्थापना के बाद से अपने पांच साल के कार्यकाल में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के पारिश्रमिक में एक बार भी वृद्धि नहीं की है* मानदेय वृद्धि ना करने का एक रिकॉर्ड बनाया है, इसी के साथ कार्यभार में कई गुना वृद्धि की है और वर्कर्स के काम के घंटे कई गुना बढ़ाए हैं।

किरण बाला और महासचिव सीमा ने कहा की  केंद्र सरकार ने  अब बजट में 300 करोड़ रुपये से अधिक की कटौती की गई है। 2023-24 में 21521.13 करोड़ रुपये से अब 21200 करोड़ रुपये हो गया है।*

इसका मतलब है कि केंद्रीय निधि जारी न होने के कारण आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के वेतन के भुगतान में लगातार देरी, किराया, टीए/डीए, पोषण के लिए धन आदि का कई महीनों तक भुगतान न होना।

*इसका मतलब है कि अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों के लिए दिन-रात काम करने वाली वर्कर को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद न्यूनतम वेतन के बिना पेंशन या ग्रेच्युटी के नौकरी से बाहर होना पड़ेगा*

आयुष्मान भारत योजना में आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को शामिल करने की घोषणा हास्यास्पद है क्योंकि उनमें से अधिकांश पहले से ही इस योजना के तहत आच्छादित हैं क्योंकि उनकी आय बहुत कम है। प्रोजेक्ट अध्यक्ष  किरण महासचिव सीमा, धन्वंती , सीमा, कांता देवी ने कहा की बजट  से पता चलता है कि मोदी सरकार  आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के प्रति क्या रवैया है। जिसको यूनियन  कभी भी बर्दाश्त नहीं करेगी। *यूनियन के  नेतृत्व ने कहा की  आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से हड़ताल में शामिल होंगी  और आंगनवाड़ी वर्करज और हेल्परज की अनदेखी पर लोकसभा चुनाव में भाजपा को करारा जवाब देने का आहवाहन किया है*




Comments

Popular posts from this blog

मंडी में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत पर 8 जनवरी सीटू से संबंधित आंगनवाड़ी यूनियन करेंगी प्रदर्शन

तीन माह से केंद्र से नहीं मिल रहा मानदेय, और पोषण ट्रैकर और टी एच आर के लिए हर माह ओ टी पी के नाम पर लाभार्थी भी करते है प्रताड़ित*

तीन माह से लंबित केंद्र का मानदेय तत्काल जारी किया जाए।