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Showing posts from November, 2025

भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

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*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

हिमाचल में दलित अस्मिता का ज्वालामुखी फूटा: 17 नवंबर को उठी आवाज़ अब सिर्फ विरोध नहीं, नया सामाजिक आंदोलन है:--आशीष कुमार

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हिमाचल में दलित अस्मिता का ज्वालामुखी फूटा: 17 नवंबर को उठी आवाज़ अब सिर्फ विरोध नहीं, नया सामाजिक आंदोलन है :--- आशीष कुमार  संयोजक शोषण मुक्ति मंच हिमाचल प्रदेश   ------------------------------------------------- हिमाचल प्रदेश को अक्सर एक शांत, सुरक्षित और प्रगतिशील राज्य के रूप में पेश किया जाता रहा है, लेकिन 17 नवंबर 2025 ने इस छवि की परतें उधेड़ दीं। इस दिन उठी आवाज़ें किसी अचानक गुस्से का परिणाम नहीं थीं, बल्कि दशकों से जमा हुए अपमान, उत्पीड़न और प्रशासनिक बेरुख़ी का फट पड़ा ज्वालामुखी थीं। रोहड़ू में दलित बच्चे सिकंदर की संदिग्ध मौत से लेकर कुल्लू–सैंज की दलित महिला की निर्मम हत्या तक, हाल की घटनाओं ने यह साफ किया कि हिमाचल की “शांति” दरअसल हाशिये पर धकेले गए समुदायों की चुप्पी पर टिकी हुई थी। इस चुप्पी ने अब विद्रोह का रूप ले लिया है, और यह विद्रोह सिर्फ विरोध तक सीमित नहीं—बल्कि सामाजिक पुनर्गठन की दिशा में बढ़ता कदम है। इस राज्यव्यापी प्रदर्शन की सबसे बड़ी विशेषता उसकी व्यापकता और संगठित रूप था। ये विरोध   किन्नौर   मंडी, रामपुर,, शिमला, बालीचौकी,...

हमीरपुर में महिला पर नाबालिग द्वारा दराती से हमला — पांच दिन बाद PGI में महिला की दर्दनाक मौत

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 *हमीरपुर में महिला पर नाबालिग द्वारा दराती से हमला — पांच दिन बाद PGI में महिला की दर्दनाक मौत *,  शोषण मुक्ति मंच  राज्य  जिला कमेटी हिमाचल प्रदेश अभी हाल ही  में  हमीरपुर ज़िले में घटी यह हृदयविदारक घटना प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा पर गम्भीर सवाल खड़े करती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पूर्व एक नाबालिग ने एक महिला पर दराती से जानलेवा हमला किया था, जिसके बाद घायल महिला को गंभीर अवस्था में पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती करवाया गया। पाँच दिन तक जीवन और मृत्यु से संघर्ष करने के बाद महिला ने दम तोड़ दिया। मंच के राज्य  संयोजक आशीष कुमार ओर सह संयोजक राजेश कोष ओर मिंटा जिंटा  ने कहा कि  शोषण मुक्ति मंच हिमाचल प्रदेश राज्य   कमेटी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करता है और मांग करता है कि: . दोषी नाबालिग पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की सीमाओं में रहते हुए कठोरतम कार्रवाई की जाए। पीड़िता के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता और सुरक्षा दी जाए। प्रदेश सरकार महिला सुरक्षा के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाए, ताकि इस तरह की घटनाएँ दोबारा न हों। मंच का ...