हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार: आधुनिक हिमाचल की नींव रखने वाले युगदृष्टा — आशीष कुमार

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जब भी हिमाचल प्रदेश के निर्माण और विकास की चर्चा होगी, सबसे पहला नाम डॉ. यशवंत सिंह परमार का लिया जाएगा। उन्हें केवल हिमाचल प्रदेश का प्रथम मुख्यमंत्री कहना उनके व्यक्तित्व और योगदान को सीमित कर देना होगा। वे उस विचार के जनक थे जिसने बिखरे हुए पहाड़ी क्षेत्रों को एक सशक्त, आत्मसम्मानी और विकासोन्मुख राज्य के रूप में स्थापित किया। आधुनिक हिमाचल जिस मजबूत नींव पर आज खड़ा है, उस नींव का प्रत्येक आधार-स्तंभ डॉ. परमार की दूरदर्शिता, संघर्ष और विकास-दृष्टि का परिणाम है। इसलिए उन्हें "हिमाचल निर्माता" कहा जाता है। 4 अगस्त केवल एक महान नेता की जयंती नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति के विचारों को याद करने का अवसर है जिसने सत्ता को साधन माना, लक्ष्य नहीं। जिसने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया और जिसने हिमाचल के विकास की शुरुआत गांव, किसान और पंचायत से की। डॉ. यशवंत सिंह परमार का जन्म सिरमौर जिले के चनहालग क्षेत्र की लाना बाका पंचायत में हुआ। पहाड़ की कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े डॉ. परमार ने बचपन से ही ग्रामीण जीवन की चुनौतियों को देखा और समझा। यही अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीति और विकास की ...

पशुपालन विभाग में निकली भर्ती में एक पोस्ट भी SC ,ST के लिए नहीं

*पशुपालन विभाग में चपरासी की भर्ती में रोस्टर लागू न करने पर रोष*

 *दलित शोषण मुक्ति मंच ने लगाया भेदभाव का आरोप, हाईकोर्ट जाने की धमकी*

 *नाहन।* दलित शोषण मुक्ति मंच ने सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति वर्ग से भेदभाव करने का आरोप लगाया है। मंच के पदाधिकारियों का आरोप है कि सरकार विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए आरक्षित सीटें नहीं रख रही हैं। मंच के जिला संयोजक प्रेस को दिए एक बयान में कहा कि सरकार ने पशुपालन विभाग में पशुपालन परिचारक (चपरासी) की भर्ती के लिए जो सूची जारी की गई है उसमें अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए कोई भी सीटे नहीं दर्शाइ गई है। जो कि इस समुदाय के साथ सीधे तौर पर नाइंसाफी है। इससे यह समाज चिंतित है। उन्होंने कहा कि इस पंचायत विभाग व आईपीएच विभाग में रोस्टर नहीं लगाया गया है। आशीष कुमार ने कहा कि सरकार ने बैकलॉग की सीटें काफी समय से पहले ही नहीं भरी जा रही है। यही नहीं सहायक प्रोफेसर के पद के लिए 13 पवाइंट रोस्टर लागू किया जा रहा है। जिससे अनुसूचित जाति वर्ग बेहद चिंतित है। जिला संयोजक आशीष कुमार ने चेतावनी दी कि सरकार एससी/एसटी वर्ग के हितों के साथ खिलवाड़ करना बंद करे। उन्होंने कहा कि यदि पशु पालन विभाग में निकाली गई चपरासी की भर्ती में सरकार एससी-एसटी के लिए रोस्टर लागू नहीं करती है तो दलित शोषण मुक्ति मंच हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। यही नहीं प्रदेश भर में बैठके आयोजित करके सरकार की मंशा से भी समुदाय के लोगों को अवगत करवाएगा।

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