भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

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*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

तीन माह से वेतन न मिलने पर आँगनवाड़ी वर्करों मे रोष*


 *तीन माह से वेतन न मिलने पर आँगनवाड़ी  वर्कर्ज हेल्पर्ज  मे रोष*



*आँगनवाड़ी  हेल्पर्ज कि पदोन्नति मे  आयु सीमा रखने के विरोध मे सचिवालय का घेराव करेगी यूनियन*


आंगनवाड़ी वर्कर्स हेल्पर फेडरेशन ऑफ़ इंडिया संबंधित सीटू की प्रोजेक्ट कमेटी के अध्यक्ष शीला ठाकुर और सचिव  सीता तोमर और सीटू जिला मासचिव आशीष कुमार  ने कहा है कि आंगनवाड़ी वर्कर्स और हेल्पर को पिछले तीन माह से उन्हें पूरा वेतन नहीं मिल रहा है एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है दूसरी तरफ   उन् आंगनवाड़ी वर्कर्स और हेल्परज् को  दिन-रात घर-घर जाकर सरकारी योजनाओं का  प्रचार करते हैं उन्ही  वर्कर्स और हेल्पर को पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिल रहा है यूनियन के पदाधिकारी ने बताया कि इससे पहले भी कई बार विभाग को इस बारे में सूचित किया जा चुका है परंतु विभाग की तरफ से इस पर कोई भी उचित कार्यवाही नहीं की जाती  सीटू जिला महासचिव आशीष कुमार ने कहा कि जैसा कि आए दिन आप देख रहे हैं कि आंगनबाड़ी वर्कर्स  और हेल्परज  पर सरकार दिन-रात हमले कर रही है और इस योजना को खत्म करने की पुरी साजिश रच रही है   रही है  लेकिन संगठन के दबाव ने चलते अपने मनसूबों मे कामयाब नहीं हि रही है । शीला ठाकुर और सीता तोमर ने बताया की 

 यूनियन निरंतर अपनी मांगों को सरकार के समक्ष उठा रही है । इस्के इलावा सीटू महासचिव ने कहा कि सरकार चाहे केंदर  की  हो या राज्य की सरकार  आईसीडीएस को खत्म करने की एक साजिश   रही है  जोकि यूनियन   कभी भी संभव  नहीं होने देंगी  , इन्ही कोशिशों को  नाकाम करने के लिए 25 से 27 नवंबर को शिमला सचिवालय के बाहर एक महापड़ाव का आयोजन किया जा रहा है इस महापड़ाव  में आंगनबाड़ी से संबंधित मांगों को उठाया जाएगा, जिसमे  महापड़ाव में  जिला सिरमौर से भी  हजारों की तादाद में आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर भाग लेंगे शीला ठाकुर ने कहा कि सिर्फ आंगनवाड़ी वर्कर्स के वेतन को हि रोकना  सरकार की एक सोची  समझी साजिश है। शीला ठाकुर ने कहा कि पहले ही विभाग ने आंगनवाड़ी हेल्पर्ज  को जो प्रमोशन में जो कोटा मिलता था उसकी उम्र  सीमा 35 वर्ष कर दी है जोकि न्याय संगत  नहीं है ।  किसी भी विभाग मे पदोन्नति के लिए आयु सीमा नहीं होती , आशीष कुमार ने कहा की इस तरह का रवैया आंगनवाड़ी हेल्पर्ज  के साथ अन्याय है यूनियन का मानना है कि सरकार की गलत नीतिया   और नरेंद्र मोदी सरकार आंगनबाड़ी  और icds पर निरंतर हमले कर रही है , जिसको कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जायेगा

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