भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

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*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

*20 मई की हड़ताल मेहनकश के अधिकारों और आजीविका पर शासक वर्ग के क्रूर हमलों के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई होगी* ----------:आशीष



आज सीटू जिला सिरमौर ने अंतर्राष्ट्रीय मई दिवस के अवसर पर धौला कुंवा में फैक्ट्री पर गेट मीटिंग आयोजित की और सीटू जिला महासचिव ने ध्वजारोहन किया। इस अवसर पर टाटा कंस्यूमर वर्करज यूनियन के अध्यक्ष लेख राज, महासचिव बंसीलाल, पूर्व महासचिव जालम सिंह, गुमान सिंह, लखबीर चौहान आदि सैकड़ों मजदूरों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान, सीटू महासचिव आशीष कुमार ने आम सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मई दिवस 2025 पर, सीटू दुनिया के मेहनतकश लोगों को क्रांतिकारी शुभकामनाएं देता है जो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए और नवउदारवादी पूंजीवादी व्यवस्था के आक्रामक हमले का मुकाबला करने के लिए अथक संघर्ष कर रहे हैं।

आशीष कुमार ने कहा कि सीटू भारत के मजदूर वर्ग को सलाम करता है, जो 20 मई, 2025 को अखिल भारतीय आम हड़ताल के लिए कमर कस रहा है। यह ऐतिहासिक हड़ताल मेहनतकश लोगों के अधिकारों और आजीविका पर शासक वर्गों के क्रूर हमलों के खिलाफ भारतीय मजदूर वर्ग की सबसे बड़ी कार्रवाई होगी।

कार्यक्रम के दौरान, सीटू ने मजदूर वर्ग और मेहनतकश लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और शोषणकारी व्यवस्था को बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इसके अतिरिक्त, दोपहर बाद काला आम्ब क्षेत्र में पर्चा वितरण किया गया और मजदूरों को मजदूर दिवस और 20 मई की हड़ताल की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का समापन मई दिवस जिंदाबाद, मजदूर-किसान गठबंधन जिंदाबाद, समाजवाद जिंदाबाद और साम्राज्यवाद मुर्दाबाद के नारों के साथ हुआ।

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