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Showing posts from November, 2025

जाति का दर्द नही झेला. इसलिए आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*:--आशीष कुमार

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 *जाति का दर्द नही झेला. इसलिए  आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*  *गरीबी नहीं, सामाजिक भेदभाव है असली कारण*           ( आशीष कुमार. राज्य संयोजक शोषण मुक्ति मंच ) शांता कुमार  द्वारा कुछ दिन पूर्व दिये ब्यान में  यह कहना कि देश में आरक्षण का आधार जाति नहीं बल्कि केवल गरीबी होना चाहिए, न तो कोई नया तर्क है और न ही यह भारतीय समाज की वास्तविकता को समझने वाला दृष्टिकोण है। सच यह है कि भारत में आरक्षण की व्यवस्था गरीबी दूर करने के लिए नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे जातिगत भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और अवसरों की असमानता को दूर करने के लिए बनाई गई थी। भारत का संविधान, जिसे B. R. Ambedkar जैसे महान समाज सुधारकों ने गढ़ा, इस सच्चाई को स्वीकार करता है कि कुछ जातियों को केवल आर्थिक रूप से नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी दबाया गया। इसलिए आरक्षण सामाजिक न्याय का एक संवैधानिक उपाय है, न कि कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम। अगर आरक्षण को केवल आर्थिक आधार से जोड़ने की बात की जाती है, तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि EWS आरक्षण पर शांता कुमार जैसे नेता अक्सर खाम...

हिमाचल में दलित अस्मिता का ज्वालामुखी फूटा: 17 नवंबर को उठी आवाज़ अब सिर्फ विरोध नहीं, नया सामाजिक आंदोलन है:--आशीष कुमार

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हिमाचल में दलित अस्मिता का ज्वालामुखी फूटा: 17 नवंबर को उठी आवाज़ अब सिर्फ विरोध नहीं, नया सामाजिक आंदोलन है :--- आशीष कुमार  संयोजक शोषण मुक्ति मंच हिमाचल प्रदेश   ------------------------------------------------- हिमाचल प्रदेश को अक्सर एक शांत, सुरक्षित और प्रगतिशील राज्य के रूप में पेश किया जाता रहा है, लेकिन 17 नवंबर 2025 ने इस छवि की परतें उधेड़ दीं। इस दिन उठी आवाज़ें किसी अचानक गुस्से का परिणाम नहीं थीं, बल्कि दशकों से जमा हुए अपमान, उत्पीड़न और प्रशासनिक बेरुख़ी का फट पड़ा ज्वालामुखी थीं। रोहड़ू में दलित बच्चे सिकंदर की संदिग्ध मौत से लेकर कुल्लू–सैंज की दलित महिला की निर्मम हत्या तक, हाल की घटनाओं ने यह साफ किया कि हिमाचल की “शांति” दरअसल हाशिये पर धकेले गए समुदायों की चुप्पी पर टिकी हुई थी। इस चुप्पी ने अब विद्रोह का रूप ले लिया है, और यह विद्रोह सिर्फ विरोध तक सीमित नहीं—बल्कि सामाजिक पुनर्गठन की दिशा में बढ़ता कदम है। इस राज्यव्यापी प्रदर्शन की सबसे बड़ी विशेषता उसकी व्यापकता और संगठित रूप था। ये विरोध   किन्नौर   मंडी, रामपुर,, शिमला, बालीचौकी,...

हमीरपुर में महिला पर नाबालिग द्वारा दराती से हमला — पांच दिन बाद PGI में महिला की दर्दनाक मौत

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 *हमीरपुर में महिला पर नाबालिग द्वारा दराती से हमला — पांच दिन बाद PGI में महिला की दर्दनाक मौत *,  शोषण मुक्ति मंच  राज्य  जिला कमेटी हिमाचल प्रदेश अभी हाल ही  में  हमीरपुर ज़िले में घटी यह हृदयविदारक घटना प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा पर गम्भीर सवाल खड़े करती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पूर्व एक नाबालिग ने एक महिला पर दराती से जानलेवा हमला किया था, जिसके बाद घायल महिला को गंभीर अवस्था में पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती करवाया गया। पाँच दिन तक जीवन और मृत्यु से संघर्ष करने के बाद महिला ने दम तोड़ दिया। मंच के राज्य  संयोजक आशीष कुमार ओर सह संयोजक राजेश कोष ओर मिंटा जिंटा  ने कहा कि  शोषण मुक्ति मंच हिमाचल प्रदेश राज्य   कमेटी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करता है और मांग करता है कि: . दोषी नाबालिग पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की सीमाओं में रहते हुए कठोरतम कार्रवाई की जाए। पीड़िता के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता और सुरक्षा दी जाए। प्रदेश सरकार महिला सुरक्षा के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाए, ताकि इस तरह की घटनाएँ दोबारा न हों। मंच का ...