जाति का दर्द नही झेला. इसलिए आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*:--आशीष कुमार

Image
 *जाति का दर्द नही झेला. इसलिए  आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*  *गरीबी नहीं, सामाजिक भेदभाव है असली कारण*           ( आशीष कुमार. राज्य संयोजक शोषण मुक्ति मंच ) शांता कुमार  द्वारा कुछ दिन पूर्व दिये ब्यान में  यह कहना कि देश में आरक्षण का आधार जाति नहीं बल्कि केवल गरीबी होना चाहिए, न तो कोई नया तर्क है और न ही यह भारतीय समाज की वास्तविकता को समझने वाला दृष्टिकोण है। सच यह है कि भारत में आरक्षण की व्यवस्था गरीबी दूर करने के लिए नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे जातिगत भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और अवसरों की असमानता को दूर करने के लिए बनाई गई थी। भारत का संविधान, जिसे B. R. Ambedkar जैसे महान समाज सुधारकों ने गढ़ा, इस सच्चाई को स्वीकार करता है कि कुछ जातियों को केवल आर्थिक रूप से नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी दबाया गया। इसलिए आरक्षण सामाजिक न्याय का एक संवैधानिक उपाय है, न कि कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम। अगर आरक्षण को केवल आर्थिक आधार से जोड़ने की बात की जाती है, तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि EWS आरक्षण पर शांता कुमार जैसे नेता अक्सर खाम...

हिमाचल पटवारी भर्ती में एससी व गरीब वर्ग को फीस में राहत न देना — हिमाचल सरकार का आरक्षण विरोधी कदम :

 हिमाचल पटवारी भर्ती में एससी व गरीब वर्ग को फीस में राहत न देना —  हिमाचल सरकार का आरक्षण  विरोधी कदम  : 


हर वर्ग के बेरोजगार युवाओं के साथ है खिलवाड

शोषण मुक्ति मंच


शोषण मुक्ति मंच हिमाचल प्रदेश ने पटवारी भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जाति वर्ग एवं गरीब तबके को परीक्षा शुल्क में कोई राहत न दिए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। मंच का कहना है कि हर वर्ग के लिए 800 रुपये की समान फीस निर्धारण कर कमजोर तबकों को परीक्षा में बैठने से हतोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है, जो कि सामाजिक न्याय और आरक्षण की भावना के खिलाफ है।


मंच के राज्य संयोजक आशीष कुमार एवं मिन्टा जिंटा, जगत राम, कर्मचंद  भाटिया, प्रीत पाल मट्टू, गोपाल  जिलटा, मनासा राम, नरेंद्र  विरुद्ध, विवेक कश्यप,  Er धरोच, ने संयुक्त बयान में कहा कि यह कदम सुखु सरकार द्वारा आरक्षण व्यवस्था को धीरे–धीरे खत्म करने की दिशा में पहला संकेत है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर, दलित और वंचित वर्ग पहले से ही संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं, ऐसे में भारी फीस लगाना उनके संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है।


बैठक की  अध्यक्षता गोपाल जिलटा ने की। बैठक में जगत राम, प्रीत पाल मट्टू, कर्मचाँद भाटिया,सतपाल मान, नैन सिंह, संदीप भारती, कमल, राजबन नेगी,  इन्दर सिंह,मथरादास ,उजागर, नेक राम,तिलक राज सहित कई साथियों ने भाग लिया और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष को और तेज करने का संकल्प लिया।


बैठक में निर्णय लिया गया कि शोषण मुक्ति मंच का गठन पंचायत स्तर तक किया जाएगा, ताकि जमीनी स्तर पर सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूती मिल सके। मंच ने सरकार से मांग की कि सरकारी विभागों में होने वाली सभी भर्तियों—चाहे वे आउटसोर्स हों या वन मित्र, पशु मित्र, श्रमिक मित्र जैसी योजनाओं के तहत—में आरक्षण रोस्टर को सख्ती से लागू किया जाए और कमजोर वर्गों को परीक्षा शुल्क में समुचित राहत दी जाए।


शोषण मुक्ति मंच ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस जनविरोधी फैसले को वापस नहीं लिया, तो प्रदेश भर में व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा।


Comments

Popular posts from this blog

मंडी में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत पर 8 जनवरी सीटू से संबंधित आंगनवाड़ी यूनियन करेंगी प्रदर्शन

तीन माह से केंद्र से नहीं मिल रहा मानदेय, और पोषण ट्रैकर और टी एच आर के लिए हर माह ओ टी पी के नाम पर लाभार्थी भी करते है प्रताड़ित*

तीन माह से लंबित केंद्र का मानदेय तत्काल जारी किया जाए।