जाति का दर्द नही झेला. इसलिए आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*:--आशीष कुमार

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 *जाति का दर्द नही झेला. इसलिए  आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*  *गरीबी नहीं, सामाजिक भेदभाव है असली कारण*           ( आशीष कुमार. राज्य संयोजक शोषण मुक्ति मंच ) शांता कुमार  द्वारा कुछ दिन पूर्व दिये ब्यान में  यह कहना कि देश में आरक्षण का आधार जाति नहीं बल्कि केवल गरीबी होना चाहिए, न तो कोई नया तर्क है और न ही यह भारतीय समाज की वास्तविकता को समझने वाला दृष्टिकोण है। सच यह है कि भारत में आरक्षण की व्यवस्था गरीबी दूर करने के लिए नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे जातिगत भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और अवसरों की असमानता को दूर करने के लिए बनाई गई थी। भारत का संविधान, जिसे B. R. Ambedkar जैसे महान समाज सुधारकों ने गढ़ा, इस सच्चाई को स्वीकार करता है कि कुछ जातियों को केवल आर्थिक रूप से नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी दबाया गया। इसलिए आरक्षण सामाजिक न्याय का एक संवैधानिक उपाय है, न कि कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम। अगर आरक्षण को केवल आर्थिक आधार से जोड़ने की बात की जाती है, तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि EWS आरक्षण पर शांता कुमार जैसे नेता अक्सर खाम...

आंगनवाड़ी यूनियन ने किया 12 फरवरी हड़ताल का एलान, चार लेबर कोड का विरोध तेज,

 *12 फरवरी क़ो किया हड़ताल  का एलान, चार लेबर कोड का विरोध तेज,



मानदेय व पोषण ट्रैकर की समस्याओं पर रोष

आंगनवाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन की प्रोजेक्ट कमेटी पच्छाद की बैठक प्रोजेक्ट उपाध्यक्ष ममता की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में प्रोजेक्ट महासचिव श्यामा शर्मा, राज्य महासचिव वीना शर्मा, कोषाध्यक्ष किरण भंडारी सहित अन्य पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा मजदूर विरोधी चार लेबर कोड—वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता—का कड़ा विरोध किया। वक्ताओं ने कहा कि इन लेबर कोडों से श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे और आंगनवाड़ी वर्कर एवं हेल्पर को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा, स्थायित्व और भविष्य की गारंटी समाप्त हो जाएगी, जिसे यूनियन किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी।

उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कर्मियों को समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में पोषण ट्रैकर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं पर भी गहरी चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि बार-बार तकनीकी दिक्कतों के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है और इसका अनावश्यक दबाव आंगनवाड़ी कर्मियों पर डाला जा रहा है।

इसके साथ ही आंगनवाड़ी वर्करों से विभिन्न विभागों के कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन उनकी जिम्मेदारी लेने को कोई भी विभाग तैयार नहीं है। अतिरिक्त कार्यभार के बावजूद न तो उचित मानदेय दिया जा रहा है और न ही सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन सभी मांगों और समस्याओं को लेकर यूनियन ने केंद्र एवं राज्य सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना की और चेतावनी दी कि यदि आंगनवाड़ी वर्कर एवं हेल्पर की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि चार लेबर कोड के विरोध और अन्य लंबित मांगों को लेकर 12 फरवरी को प्रदेशभर में आंगनवाड़ी वर्कर एवं हेल्पर प्रदेशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे, ताकि सरकार तक अपनी आवाज मजबूती से पहुंचाई जा सके।बैठक मे अनुराधा, पूर्णिमा, कमलेश, मीनाक्षी, संतोष,ओम देवी  आदि दर्जनो कार्यकर्ता उपस्थित रहे l

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