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हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार: आधुनिक हिमाचल की नींव रखने वाले युगदृष्टा — आशीष कुमार

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जब भी हिमाचल प्रदेश के निर्माण और विकास की चर्चा होगी, सबसे पहला नाम डॉ. यशवंत सिंह परमार का लिया जाएगा। उन्हें केवल हिमाचल प्रदेश का प्रथम मुख्यमंत्री कहना उनके व्यक्तित्व और योगदान को सीमित कर देना होगा। वे उस विचार के जनक थे जिसने बिखरे हुए पहाड़ी क्षेत्रों को एक सशक्त, आत्मसम्मानी और विकासोन्मुख राज्य के रूप में स्थापित किया। आधुनिक हिमाचल जिस मजबूत नींव पर आज खड़ा है, उस नींव का प्रत्येक आधार-स्तंभ डॉ. परमार की दूरदर्शिता, संघर्ष और विकास-दृष्टि का परिणाम है। इसलिए उन्हें "हिमाचल निर्माता" कहा जाता है। 4 अगस्त केवल एक महान नेता की जयंती नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति के विचारों को याद करने का अवसर है जिसने सत्ता को साधन माना, लक्ष्य नहीं। जिसने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया और जिसने हिमाचल के विकास की शुरुआत गांव, किसान और पंचायत से की। डॉ. यशवंत सिंह परमार का जन्म सिरमौर जिले के चनहालग क्षेत्र की लाना बाका पंचायत में हुआ। पहाड़ की कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े डॉ. परमार ने बचपन से ही ग्रामीण जीवन की चुनौतियों को देखा और समझा। यही अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीति और विकास की ...

हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार: आधुनिक हिमाचल की नींव रखने वाले युगदृष्टा — आशीष कुमार

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जब भी हिमाचल प्रदेश के निर्माण और विकास की चर्चा होगी, सबसे पहला नाम डॉ. यशवंत सिंह परमार का लिया जाएगा। उन्हें केवल हिमाचल प्रदेश का प्रथम मुख्यमंत्री कहना उनके व्यक्तित्व और योगदान को सीमित कर देना होगा। वे उस विचार के जनक थे जिसने बिखरे हुए पहाड़ी क्षेत्रों को एक सशक्त, आत्मसम्मानी और विकासोन्मुख राज्य के रूप में स्थापित किया। आधुनिक हिमाचल जिस मजबूत नींव पर आज खड़ा है, उस नींव का प्रत्येक आधार-स्तंभ डॉ. परमार की दूरदर्शिता, संघर्ष और विकास-दृष्टि का परिणाम है। इसलिए उन्हें "हिमाचल निर्माता" कहा जाता है। 4 अगस्त केवल एक महान नेता की जयंती नहीं है, बल्कि उस व्यक्ति के विचारों को याद करने का अवसर है जिसने सत्ता को साधन माना, लक्ष्य नहीं। जिसने राजनीति को जनसेवा का माध्यम बनाया और जिसने हिमाचल के विकास की शुरुआत गांव, किसान और पंचायत से की। डॉ. यशवंत सिंह परमार का जन्म सिरमौर जिले के चनहालग क्षेत्र की लाना बाका पंचायत में हुआ। पहाड़ की कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े डॉ. परमार ने बचपन से ही ग्रामीण जीवन की चुनौतियों को देखा और समझा। यही अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीति और विकास की ...

मजदूर दिवस और बुद्ध पूर्णिमा: श्रम, करुणा और न्याय का प्रश्न* :---- आशीष कुमार

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 *मजदूर दिवस और बुद्ध पूर्णिमा: श्रम, करुणा और न्याय का प्रश्न* :---- आशीष कुमार आशी आज एक ओर पूरी दुनिया मजदूर दिवस मना रही है, तो दूसरी ओर बुद्ध पूर्णिमा भी है। यह संयोग केवल कैलेंडर का नहीं, बल्कि विचारों का है—श्रम और करुणा, न्याय और मानव गरिमा के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है । मजदूर दिवस हमें उन हाथों की संघर्षों की  याद दिलाता है, जिन्होंने दुनिया को गढ़ा है। बुद्ध पूर्णिमा हमें उस चेतना की याद दिलाती है, जिसने मनुष्य को दुःख, असमानता और शोषण के कारणों को समझने और उनसे मुक्ति की दिशा दिखाई। मजदूर दिवस का ऐतिहासिक आधार भारत में पहली बार 1 मई 1923 को मजदूर दिवस मनाया गया था। इसके पीछे पूरी दुनिया में हुए मजदूर आंदोलनों की लंबी श्रृंखला थी, जिसकी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 1886 का शिकागो आंदोलन रहा, जहाँ 8 घंटे काम के अधिकार के लिए मजदूरों ने संघर्ष किया और अपने जीवन तक बलिदान कर दिए। यह इतिहास बताता है कि श्रम अधिकार कभी दया से नहीं मिले, बल्कि संघर्ष और संगठित शक्ति से प्राप्त हुए हैं। परन्तु  आज का सवाल भी यही है  क्या मजदूर की स्थिति बदली है?  लगभग एक सदी के...

पंचायती राज संस्थाओं में क्या प्रतिनिधित्व सिर्फ दिखावा है, या फैसले लेने की ताकत सच में बदली है?*”

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 *पंचायती राज संस्थाओं में क्या प्रतिनिधित्व सिर्फ दिखावा है, या फैसले लेने की ताकत सच में बदली है?*” आशीष कुमार आशी ______________________________________________ हिमाचल प्रदेश में देर से ही सही  मगर पंचायती राज चुनाव का बिगुल बज चुका है ,इस प्रक्रिया. को पुरा करने से पहली सबसे बड़ी चुनौती जो होती है.  रोस्टर प्रणाली  जो  की हमारे पंचायती राज अधिनियम् 1994 के तहत तय किया जाता है और यह हमारे संविधान के 73 वें संशोधन के अनुरूप है । इस संशोधन  से   पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य स्पष्ट था दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्गों और महिलाओं को स्थानीय सत्ता में भागीदारी सुनिश्चित करना। कागज़ों पर यह व्यवस्था लोकतंत्र को गहराई देती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कई स्थानों पर इसकी प्रभावशीलता सीमित नजर आती है। पंचायतों में सीटें आरक्षित जरूर हैं, पर वास्तविक निर्णय लेने की प्रक्रिया कई बार कुछ सीमित हाथों में सिमटी हुई दिखाई देती है। गांवों में “भाईचारा” और “सहमति” के नाम पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की प्रवृत्ति भी सामने आती है। कई बार उम्...

पंचायती राज को मजबूत करने व जनता के मुद्दों को लेकर जिला परिषद से शहरी निकाय तक हस्तक्षेप करेगी सीपीएम”

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 पंचायती राज को मजबूत करने व जनता के मुद्दों को लेकर जिला परिषद से शहरी निकाय तक हस्तक्षेप करेगी सीपीएम नाहन, दिनांक — आगामी पंचायत एवं शहरी निकाय चुनावों को लेकर आज सीपीएम जिला केंद्र की एक महत्वपूर्ण बैठक नाहन में आयोजित की गई। बैठक में स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई और यह निर्णय लिया गया कि पार्टी इन चुनावों में जनता की जमीनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए सक्रिय हस्तक्षेप करेगी। बैठक में यह भी तय किया गया कि चुनावों के माध्यम से जनविरोधी नीतियों को उजागर किया जाएगा, जिनके कारण आम जनता के जीवन पर लगातार नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण स्तर पर लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत संचालित मनरेगा को कमजोर किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि इससे आने वाले समय में ग्रामीण रोजगार और गांवों के विकास पर गंभीर असर पड़ेगा। बैठक में यह भी सामने आया कि जिले में कृषि, बागवानी और दुग्ध उत्पादन से बड़ी आबादी जुड़ी होने के बावजूद इन क्षेत्रों के विकास के लिए ठोस नीतिगत प्रावधानों का अभाव है। ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक सेवाओं की स्थि...

अम्बेडकरवाद: संघर्ष का व्यापक औजार, न कि सीमित पहचान की मीनार* — आशीष कुमार

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*अम्बेडकरवाद: संघर्ष का व्यापक औजार, न कि सीमित पहचान की मीनार* — आशीष कुमार _____________________________ भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद रखने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर को अक्सर “संविधान के जनक” के रूप में याद किया जाता है। संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने एक ऐसे भारत की कल्पना की थी, जहां समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व केवल शब्द न होकर जीवन का आधार बनें। लेकिन आज के दौर में अंबेडकर को समझना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है, क्योंकि जिन मूल्यों के लिए उन्होंने संघर्ष किया, वही आज चुनौती के घेरे में हैं। हर साल 14 अप्रैल को मनाई जाने वाली अम्बेडकर जयंती केवल एक औपचारिक श्रद्धांजलि का दिन नहीं है, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का अवसर भी है। वर्ष 2026 में हम अंबेडकर की 135वीं जयंती मना रहे हैं,यह केवल एक स्मरण नहीं, बल्कि उनके विचारों को वर्तमान संघर्षों से जोड़ने का महत्वपूर्ण क्षण है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि अंबेडकर के विचारों को सिर्फ माल्यार्पण तक सीमित करना, उनके संघर्ष की भावना के साथ अन्याय है। असली श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम उनके बताए रास्ते पर चलकर सामाजिक ब...

108/102 एम्बुलेंस कर्मियों का संघर्ष और व्यवस्था की संवेदनहीनता

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 “भारी बारिश में बैठे जीवन रक्षक: सरकार ने कि सके आगे घुटने टेक दिए?” 108/102 एम्बुलेंस कर्मियों का संघर्ष और व्यवस्था की संवेदनहीनता अब फैसला सरकार को करना है—वह जनता के साथ खड़ी होगी या कंपनियों के साथ?                                आशीष कुमार सीटू हिमाचल प्रदेश  __________________________________________ भारी बारिश में भीगते हुए, सड़क पर डटे ये लोग कोई आम प्रदर्शनकारी नहीं हैं—ये वही जीवन रक्षक हैं, जिनके भरोसे हर दिन अनगिनत जिंदगियां अस्पताल तक पहुंचती हैं। आज वही हाथ, जो दूसरों की जान बचाते हैं, अपने ही रोजगार और अधिकार बचाने के लिए सड़कों पर बैठे हैं। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 120 घंटे का दिन-रात महापड़ाव जारी है। 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं से जुड़े कर्मचारी अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह केवल वेतन या सुविधा का सवाल नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और अस्तित्व की लड़ाई है। सबसे बड़ा सवाल आज सरकार से है—आखिर ऐसा क्या है कि उसने एक निजी कंपनी के आगे घुटने टेक दिए हैं? क्यों उन कर्मचारिय...

धर्म नहीं, सामाजिक न्याय आधार—आरक्षण पर फैसले पर पुनर्विचार जरूरी*

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 *धर्म नहीं, सामाजिक न्याय आधार—आरक्षण पर फैसले पर पुनर्विचार जरूरी* शोषण मुक्ति मंच, हिमाचल प्रदेश शोषण मुक्ति मंच, हिमाचल प्रदेश के राज्य संयोजक आशीष कुमार तथा सह संयोजक राजेश कोष और मिन्ता जिंटा ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर गहरी चिंता जताई है, जिसमें कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है, तो उसे अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं माना जाएगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण का सवाल किसी धर्म से नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे सामाजिक उत्पीड़न और आर्थिक शोषण से जुड़ा हुआ है। शोषण मुक्ति मंच ये  स्पष्ट रूप से मानता है कि समाज में मौजूद वर्गीय और जातिगत असमानताओं को खत्म किए बिना वास्तविक बराबरी संभव नहीं है। नेताओं ने कहा कि धर्म परिवर्तन से किसी व्यक्ति की सामाजिक स्थिति और उस पर होने वाला भेदभाव खत्म नहीं हो जाता। ऐसे में इस आधार पर आरक्षण से वंचित करना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह संविधान में निहित सामाजिक न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ भी है। उन्होंने मांग की कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और इसे संविधान पीठ के पास भेजा जाए, ताकि शोषित और वंचित वर...

जाति का दर्द नही झेला. इसलिए आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*:--आशीष कुमार

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 *जाति का दर्द नही झेला. इसलिए  आरक्षण पर दे रहे है शांता कुमार ज्ञान*  *गरीबी नहीं, सामाजिक भेदभाव है असली कारण*           ( आशीष कुमार. राज्य संयोजक शोषण मुक्ति मंच ) शांता कुमार  द्वारा कुछ दिन पूर्व दिये ब्यान में  यह कहना कि देश में आरक्षण का आधार जाति नहीं बल्कि केवल गरीबी होना चाहिए, न तो कोई नया तर्क है और न ही यह भारतीय समाज की वास्तविकता को समझने वाला दृष्टिकोण है। सच यह है कि भारत में आरक्षण की व्यवस्था गरीबी दूर करने के लिए नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे जातिगत भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और अवसरों की असमानता को दूर करने के लिए बनाई गई थी। भारत का संविधान, जिसे B. R. Ambedkar जैसे महान समाज सुधारकों ने गढ़ा, इस सच्चाई को स्वीकार करता है कि कुछ जातियों को केवल आर्थिक रूप से नहीं बल्कि सामाजिक रूप से भी दबाया गया। इसलिए आरक्षण सामाजिक न्याय का एक संवैधानिक उपाय है, न कि कोई गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम। अगर आरक्षण को केवल आर्थिक आधार से जोड़ने की बात की जाती है, तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि EWS आरक्षण पर शांता कुमार जैसे नेता अक्सर खाम...

बराबरी का अधूरा सफ़र”

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 आज कुछ खेत-खलिहान भी मेरे हैं, पानी का एक छोटा सा कुआँ भी अपने नाम लिए बैठा हूँ। अपने ही घर के समारोह में अलग थाली, अलग धाम है मेरे, देखो मैं कैसा ये हिंदुस्तान लिए बैठा हूँ। खेतों में उगा सकता हूँ सबके लिए अन्न मगर, अब भी छुआछूत का फरमान लिए बैठा हूँ। कहते हो बदल गया है दौर इस मुल्क का, मैं सदियों का मगर ज़ख़्मी इतिहास लिए बैठा हूँ। तुम्हारी सभाओं में बराबरी के नारे गूंजते हैं, मैं अपने हिस्से का अब भी अपमान लिए बैठा हूँ। याद है मुझे रोहित वेमुला का टूटा हुआ सपना, हर यूनिवर्सिटी की दीवारों पर सवाल लिए बैठा हूँ। पायल तड़वी की वो खामोश चीख भी याद है, अस्पतालों के गलियारों में इंसाफ़ की आस लिए बैठा हूँ। दर्शन सोलंकी की बुझती उम्मीदों में भी हर कैंपस में बराबरी की मशाल लिए बैठा हूँ। याद है हाथरस की वो सुलगती हुई रात, हर दलित बेटी की चीख का सवाल लिए बैठा हूँ। हर रोज़ कहीं न कहीं दलित औरत की इज़्ज़त लूटी जाती है, उनके आँसुओं का हिसाब लिए बैठा हूँ। थोड़ा सा हक़ मिला तो हंगामा मचा दिया सबने, जैसे मैं पूरे जहाँ का अधिकार लिए बैठा हूँ। घर बनाता हूँ सबके लिए, खुद ही बेघर बना  हुआ बैठा ...

संजू सैमसन ने रचा इतिहास

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  संजू सैमसन ने रचा इतिहास हालांकि इसके बाद संजू सैमसन को ईशान किशन का साथ मिला और दोनों ने भारतीय टीम को 100 रन के पार पहुंचा दिया। ईशान किशन 18 गेंद में 39 रन बनाकर आउट हुए, जिसमें उन्होंने 2 छक्के और 4 चौके लगाए। दूसरी ओर संजू सैमसन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए अपना अर्धशतक पूरा किया। वह 42 गेंद में 89 रन बनाकर आउट हुए और यह टी20 वर्ल्ड कप के नॉकआउट मैचों में भारत की ओर से संयुक्त रूप से सबसे बड़ी पारी है। इससे पहले 2016 के सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज के खिलाफ विराट कोहली ने नाबाद 89 रन बनाए थे। संजू सैमसन ने अपनी पारी में 7 चौके और 7 छक्के लगाए। सैमसन के आउट होने के बाद शिवम दुबे ने 25 गेंद में ताबड़तोड़ 43 रन ठोक दिए। हालांकि वह दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट होकर पवेलियन लौटे। दूसरी ओर सूर्यकुमार यादव एक बार फिर फ्लॉप रहे और 6 गेंद में 11 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद तिलक वर्मा ने 7 गेंदों में 3 छक्के लगाकर 21 रन की धुंआधार पारी खेली, तो हार्दिक ने 12 गेंदों में 27 रन कूट डाले। इस तरह भारतीय टीम ने 20 ओवर में 7 विकेट गंवाकर 253 रन बनाए।

सामाजिक न्याय की लड़ाई तेज़: 28 फरवरी धर्मशाला रैली में शोषण मुक्ति मंच हिमाचल प्रदेश का समर्थन*

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 *सामाजिक न्याय की लड़ाई तेज़: 28 फरवरी धर्मशाला रैली में शोषण मुक्ति मंच हिमाचल प्रदेश का समर्थन* ----------------------------------------------- 23 फरवरी को शोषण मुक्ति मंच की राज्य स्तरीय शोषण मुक्ति मंच राज्य कमेटी की वर्चुअल बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें प्रदेश के 11 जिलों से मंच के पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में मंच के राज्य संयोजक आशीष कुमार, सह संयोजक राजेश कोष, मिंटा ज़िंटा, जगत राम, मीर सुख, बुद्धि राम जस्ता, मंशा राम जी, विवेक कश्यप, नरेंद्र, करमचंद भाटिया, प्रीतिपाल मट्टू, सतपाल मान, रामचंदर, मान सिंह, नैन सिंह, संदीप भारती,सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक को संबोधित करते हुए मंच के संयोजक आशीष कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा बनाए गए नए नियम सामाजिक न्याय की दिशा में एक आवश्यक कदम हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं और ऐसे में कठोर एवं प्रभावी नियमों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 2012 के UGC विनियम जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से बनाए गए थे, किंतु बढ़ते मामलों ने यह स्पष्ट किया कि वे पर्याप्...

24 मार्च क़ो हिमाचल से दिल्ली रैली में जाएंगे हजारों सीपीआई (एम) कार्यकर्ता :-- संजय चौहान

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  भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी की बैठक डॉ. ओंकार शाद की अध्यक्षता में शिमला में हुई। बैठक में पार्टी केंद्रीय सचिवालय सदस्य विक्रम सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय व दलित मुद्दों पर पार्टी की सोच को सामने रखा। बैठक में राज्य सचिव संजय चौहान ने राज्य की राजनीतिक परिस्थिति पर बात रखी। पार्टी नेता कॉमरेड राकेश सिंघा, डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर, कुशाल भारद्वाज, डॉ. कुलदीप सिंह तंवर, प्रेम गौतम, विजेंद्र मेहरा, भूपेंद्र सिंह सहित पार्टी राज्य कमेटी के अन्य सदस्य बैठक में मौजूद रहे।   राज्य सचिव संजय चौहान ने कहा है कि मोदी सरकार की जनविरोधी, मजदूर, किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ 24 मार्च को दिल्ली में होने वाली रैली में हिमाचल प्रदेश से एक हजार से ज्यादा लोग भाग लेंगे। दिल्ली रैली के मध्यनजर पार्टी राज्य कमेटी ने भारत पर न्यूजीलैंड व यूरोपियन यूनियन द्वारा थोपे गए जनविरोधी मुक्त व्यापार समझौतों, अमरीका द्वारा थोपी गई किसान, मजदूर, उद्योग विरोधी ट्रेड डील व टैरिफ, मोदी सरकार द्वारा लाए गए मजदूर विरोधी चार लेबर कोड, जनविरोधी बिजली विधेयक 2025, ...

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की वरिष्ठता सूची तत्काल जारी कर पदोन्नति सुनिश्चित की जाए।*:--आंगनवाड़ी वर्कर्ज एवं हेल्पर्स यूनियन (संबंधित :-- सीटू) ने मुख्यमंत्री को सौंपा मांग पत्र*

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*आंगनवाड़ी वर्कर्ज एवं हेल्पर्स यूनियन (संबंधित :-- सीटू) ने मुख्यमंत्री को सौंपा मांग पत्र* *आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की वरिष्ठता सूची तत्काल जारी कर पदोन्नति सुनिश्चित की जाए।* आज आंगनवाड़ी वर्कर्ज एवं हेल्पर्स यूनियन (सीटू) के प्रतिनिधिमंडल ने माननीय मुख्यमंत्री को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपकर आंगनवाड़ी वर्करों और हेल्परों की लंबित समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। यूनियन ने कहा कि पोषण ट्रैकर के नाम पर आंगनवाड़ी वर्करों पर अतिरिक्त डिजिटल कार्यभार डाला जा रहा है, जबकि उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं। प्रत्येक वर्कर को कार्य के अनुरूप नया स्मार्ट फोन उपलब्ध करवाने की मांग की गई। मांग पत्र में प्री-प्राइमरी शिक्षा के अतिरिक्त कार्य के लिए उचित मानदेय वृद्धि, सेवाकाल पूर्ण करने पर ग्रेच्युटी का प्रावधान, तथा हरियाणा की तर्ज पर वेतनमान लागू करने की मांग को प्रमुखता से रखा गया। यूनियन ने यह भी मांग की कि आंगनवाड़ी वर्करों की वरिष्ठता के आधार पर पर्यवेक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि लंबे समय से कार्यरत कर्मियों को पदोन्नति का अवसर मिल सके। प्रतिनिधिमंडल म...

न श्रम कोड मंज़ूर, न देश की संप्रभुता से समझौता — 12 फ़रवरी को सीटू का जनआंदोलन:* ---आशीष कुमार

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 *न श्रम कोड मंज़ूर, न देश की संप्रभुता से समझौता — 12 फ़रवरी को सीटू का जनआंदोलन:*    ---आशीष कुमार  सीटू द्वारा 12 फ़रवरी को श्रम कोडों के विरोध में जिला सिरमौर के नाहन, शिलाई और राजगढ़ में विशाल प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। सीटू जिला महासचिव आशीष कुमार, जिला अध्यक्ष राजेश तोमर, कोषाध्यक्ष वीना शर्मा, तथा संदीप, नीलम शर्मा, सुदेश कुमार, विनीत, वीरेंद्र और इंदु तोमर, देव कुमारी,  शीला  ठाकुर, सुमन ने संयुक्त प्रेस बयान में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार श्रम कोड मजदूर वर्ग के अधिकारों पर सीधा हमला हैं। ये कोड मजदूरों की मेहनत से हासिल की गई उपलब्धियों को खत्म करने का प्रयास हैं। नेताओं ने कहा कि “भारत–अमेरिका व्यापार समझौते का ढांचा मोदी सरकार द्वारा ट्रंप के फरमान के आगे किया गया शर्मनाक आत्मसमर्पण है। यह भारत की संप्रभुता, स्वायत्तता तथा हमारे किसानों के अधिकारों और आजीविका पर सीधा हमला है।” ऐसी नीतियाँ देश के किसानों और मजदूरों—दोनों के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि श्रम कोडों के लागू होने से बोनस, ईएसआई (ESI) और पीएफ (PF) जैसी बुनियादी...

भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे ठोस और क्रूर हक़ीक़त :-- आशीष कुमार आशी

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*भेदभाव कल्पना नहीं,बल्कि आज की सबसे  ठोस और क्रूर  हक़ीक़त है*                        (आशीष कुमार आशी ) यूजीसी रेगुलेशन 2026 को समझने के लिए ज़रूरी है कि हम उससे पहले देश में घटित हुए उन घटनाक्रमों को अपने ज़हन में रखें, जिनसे यह साफ़ होता है कि जातिगत भेदभाव आज भी हमारी सामाजिक और शैक्षणिक संरचनाओं में गहराई से मौजूद है। जब भी आरक्षण पर सवाल उठाए जाएँ, दलित वर्ग की योग्यता पर संदेह किया जाए, या यह पूछा जाए कि “आरक्षण कब तक?”, तब अपने अंतर्मन में कुछ घटनाओं को ज़रूर स्मरण कर लेना चाहिए—पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई पर जूता फेंके जाने की घटना, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ हुआ सार्वजनिक अपमान। ऐसी घटनाएँ अपवाद नहीं हैं; इनके अनगिनत उदाहरण देश के सामाजिक इतिहास में बिखरे पड़े हैं। हम ये नहीं कहते की ugc  रेगुलेशन 2026 में कोई  कमी  नहीं  है, इसमें खामियाँ  हो सकती है, मगर ये पिछले 2012 की रेगुलेशन से बेहतर था  इसकी  आवश्यकता  इसलिए भी  थी क्यूंकि  2012 का रेग...

रोजगार नहीं 60 दिन बेरोजगारी की गारंटी है VB Ram G योजना:--सीटू

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 प्रेस नोट *शिलाई में 12 फरवरी की हड़ताल की तैयारी को लेकर सीटू से संबद्ध यूनियनों की संयुक्त बैठक*  *रोजगार नहीं 60 दिन बेरोजगारी की गारंटी है VB Ram G योजना * आज शिलाई में 12 फरवरी की प्रदेशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के उद्देश्य से सीटू से संबद्ध यूनियनों की संयुक्त आम बैठक आयोजित की गई। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता नीलम शर्मा एवं वीरेंद्र ठाकुर ने की। बैठक में सीटू जिला महासचिव आशीष कुमार तथा किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष जीवन सिंह ने विशेष रूप से भाग लिया। विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक को संबोधित करते हुए सीटू जिला महासचिव आशीष कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार लेबर कोड मजदूर वर्ग पर सीधा हमला हैं, जिनका उद्देश्य स्थायी रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और मजदूर अधिकारों को समाप्त करना है। इन कानूनों के माध्यम से मजदूरों को आधुनिक बंधुआ मजदूरी की ओर धकेला जा रहा है। आशीष कुमार ने कहा कि सरकार ने VB RAM G बिल के जरिए देश के मजदूर वर्ग को साल में 60 दिन की बेरोजगारी की गारंटी देने का काम किया है। यह शायद देश के इतिहास में पहली ब...

आंगनवाड़ी यूनियन ने किया 12 फरवरी हड़ताल का एलान, चार लेबर कोड का विरोध तेज,

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 *12 फरवरी क़ो किया हड़ताल  का एलान, चार लेबर कोड का विरोध तेज, मानदेय व पोषण ट्रैकर की समस्याओं पर रोष आंगनवाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन की प्रोजेक्ट कमेटी पच्छाद की बैठक प्रोजेक्ट उपाध्यक्ष ममता की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में प्रोजेक्ट महासचिव श्यामा शर्मा, राज्य महासचिव वीना शर्मा, कोषाध्यक्ष किरण भंडारी सहित अन्य पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा मजदूर विरोधी चार लेबर कोड—वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता—का कड़ा विरोध किया। वक्ताओं ने कहा कि इन लेबर कोडों से श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे और आंगनवाड़ी वर्कर एवं हेल्पर को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा, स्थायित्व और भविष्य की गारंटी समाप्त हो जाएगी, जिसे यूनियन किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कर्मियों को समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में पोषण ट्रैकर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं पर भी...

कालाअंब मजदूरो की पिटाई और मौत की मामले में एट्रोसिटी एक्ट और हत्या का मामला दर्ज

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नारायणगढ़ पुलिस थाने में हत्या और एट्रोसिटी का केस दर्जनाहन में प्रदर्शन के बाद हरियाणा के नारायणगढ़ पहुंचे थे परिजन, घायल युवक के बयान पर हुई कार्रवाईनाहन :  हरियाणा की सीमा से सटे कालाअंब क्षेत्र में मजदूर युवक की पिटाई के बाद हुई मौत के मामले में अब हत्या और एट्रोसिटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। इस मामले को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने पहले नाहन में जनवादी संगठनों के बैनर तले प्रदर्शन किया और इसके बाद सीधे हरियाणा के नारायणगढ़ पुलिस थाने पहुंचे, जहां घायल युवक नीरज के बयान के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया।यह मामला जिला सिरमौर के ददाहू क्षेत्र के चूली गांव के तीन युवकों लखनपाल, विजय और नीरज से जुड़ा है, जो औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में मजदूरी करते थे। आरोप है कि गत दिनों तीनों के साथ बर्बर तरीके से मारपीट की गई, जिसमें लखनपाल गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे इलाज के लिए पीजीआई ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना में घायल नीरज का इलाज चल रहा था, जो हाल ही में उपचार के बाद घर लौटा है। इसके बाद उसने पूरे घटनाक्रम को लेकर नारायणगढ़ पुलिस थाने में ब...

मंडी में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत पर 8 जनवरी सीटू से संबंधित आंगनवाड़ी यूनियन करेंगी प्रदर्शन

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*8 जनवरी को प्रदेश-स्तरीय प्रदर्शन* *आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत पर जवाबदेही और मुआवज़े की माँग   मंडी ज़िले के तारना वृत्त में ड्यूटी पल्स पोलियो की  ड्यूटी निभाते हुए गिरने से हुई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर्षा की मृत्यु ने एक बार  हिमाचल प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से कराए जा रहे बहु-विभागीय कार्य अब मौत का जोखिम बनते जा रहे हैं, लेकिन सरकार और विभागों की संवेदनहीनता जस की तस बनी हुई है। इसी के विरोध में 8 जनवरी को पूरे प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदेश-स्तरीय प्रदर्शन किया जाएगा।  हाल ही में प्लस पोलियो अभियान के दौरान मंडी ज़िले के तारना वृत्त में ड्यूटी निभाते हुए गिरने से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर्षा की मृत्यु ने एक बार फिर इस सच्चाई को उजागर कर दिया है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से हर विभाग का काम तो लिया जाता है, लेकिन जब बात जान की आती है तो हर विभाग जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है। आंगनवाड़ी  वर्कर्स एवं हेल्परज यूनियन संबंधित सीटू   की जिला कार्यकारणी सदस्यों जिला  अध्यक्ष  शामा, महासचिव  वीना , प्रोजेक्ट पौंटा...

मंडी में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत पर जवाबदेही और मुआवज़े की माँग

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    *8 जनवरी को प्रदेश-स्तरीय प्रदर्शन* *आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत पर जवाबदेही और मुआवज़े की माँग*   मंडी ज़िले के तारना वृत्त में ड्यूटी पल्स पोलियो की  ड्यूटी निभाते हुए गिरने से हुई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर्षा की मृत्यु ने एक बार  हिमाचल प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से कराए जा रहे बहु-विभागीय कार्य अब मौत का जोखिम बनते जा रहे हैं, लेकिन सरकार और विभागों की संवेदनहीनता जस की तस बनी हुई है। इसी के विरोध में 8 जनवरी को पूरे प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदेश-स्तरीय प्रदर्शन किया जाएगा।  हाल ही में प्लस पोलियो अभियान के दौरान मंडी ज़िले के तारना वृत्त में ड्यूटी निभाते हुए गिरने से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर्षा की मृत्यु ने एक बार फिर इस सच्चाई को उजागर कर दिया है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से हर विभाग का काम तो लिया जाता है, लेकिन जब बात जान की आती है तो हर विभाग जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है। आंगनवाड़ी  वर्कर्स एवं हेल्परज यूनियन संबंधित सीटू  की राज्य अध्यक्ष नीलम जसवाल एवं महासचिव वीना  शर्मा  ने  कहा  की सर...