विद्रोही लड़कियाँ
आसमान की सीमा बदलने निकली लड़कियाँ, बंदिशों की दुनिया बदलने निकली लड़कियाँ। खामोशी की ज़ंजीरें तोड़ने निकली लड़कियाँ, अपने हिस्से की आवाज़ बनने निकली लड़कियाँ। बहुत खूबसूरत हैं ये विद्रोही लड़कियाँ, हर शहर, हर गली में लड़ती ये लड़कियाँ। आँखों में सपने, सीने में अंगार, होंठों पर नारे, कदमों में रफ़्तार। हर बंद दरवाज़ा तोड़ने निकली लड़कियाँ, पितृसत्ता की जड़ें उखाड़ने निकली लड़कियाँ। “खूब लड़ी मर्दानी”—कहते रहे ज़माने वाले, हिम्मत को मर्दों की जागीर समझने वाले। हिम्मत की हिस्सेदारी तोड़ने निकली ये लड़कियां सोच पुरानी बदलने निकली ये लड़कियां पढ़ने की चाहत, बढ़ने की चाहत, अपनी दुनिया खुद गढ़ने की चाहत। राहों की हर रुकावट हटाने निकली लड़कियाँ, अपने हिस्से का आसमान पाने निकली लड़कियाँ। न पूजा चाहिए, न दया चाहिए, बस बराबरी का हक़ चाहिए। अपनी उड़ान, अपना आसमान चाहिए, जीने का पूरा अधिकार पाने निकली लड़कियां । आँखों में कल का संसार लिए निकली ये लड़कियाँ आवाज़ में बदलाव की पुकार लिए निकली ये लड़कियां । कदमों में नई रफ़्तार लिए निकली है लड़कियां ...